राष्ट्रीय
15-Jun-2026


मुंबई, (ईएमएस)। देश की राजनीति में एक बार फिर बड़े स्तर पर राजनीतिक उठापटक और दल-बदल की चर्चाएं तेज हो गई हैं। पश्चिम बंगाल में कथित तौर पर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के नेताओं और सांसदों के असंतोष की खबरों के बीच अब महाराष्ट्र की राजनीति में भी हलचल बढ़ गई है। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) में संभावित टूट को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। - मातोश्री की बैठक के बाद बढ़ीं अटकलें सूत्रों के अनुसार, संभावित ऑपरेशन टाइगर की चर्चाओं के बीच हाल ही में उद्धव ठाकरे ने अपने निवास मातोश्री पर पार्टी सांसदों की बैठक बुलाई थी। हालांकि, इस बैठक में केवल कुछ ही सांसद मौजूद रहे, जबकि कई सांसदों ने ऑनलाइन माध्यम से हिस्सा लिया। बैठक में कई सांसदों की अनुपस्थिति ने राजनीतिक चर्चाओं को और हवा दे दी। बैठक के बाद पार्टी सांसद और वरिष्ठ नेता संजय राउत ने मीडिया से बातचीत में शिवसेना (यूबीटी) में किसी भी प्रकार की फूट की संभावना से इनकार किया था। उन्होंने कहा था कि पार्टी पूरी तरह एकजुट है और विपक्ष द्वारा अफवाहें फैलाई जा रही हैं। - संजय देशमुख और प्रतापराव जाधव की मुलाकात बनी चर्चा का विषय इसी बीच दिल्ली में ठाकरे गुट के सांसद संजय देशमुख ने केंद्रीय राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव से मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद राजनीतिक हलकों में नई चर्चाएं शुरू हो गईं। माना जा रहा है कि इस मुलाकात के राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं और इसे संभावित राजनीतिक बदलाव से जोड़कर देखा जा रहा है। सूत्रों का दावा है कि ठाकरे गुट के कुछ सांसद अलग गुट बनाने की संभावनाओं पर विचार कर रहे हैं। यह भी चर्चा है कि कुछ सांसद जल्द ही लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर सकते हैं। हालांकि, इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। - पांच सांसदों की गैरमौजूदगी ने बढ़ाया सस्पेंस मातोश्री में आयोजित बैठक में पार्टी के पांच सांसदों के अनुपस्थित रहने की खबर भी सामने आई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे समय में सांसदों की गैरमौजूदगी ने संभावित नाराजगी और अंदरूनी असंतोष की अटकलों को और मजबूत किया है। - महाराष्ट्र की राजनीति पर सबकी नजर यदि ठाकरे गुट में वास्तव में कोई बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम होता है, तो इसका असर महाराष्ट्र की राजनीति पर व्यापक रूप से पड़ सकता है। फिलहाल पार्टी नेतृत्व की ओर से किसी भी तरह की टूट या बगावत की पुष्टि नहीं की गई है। वहीं, राजनीतिक पर्यवेक्षक आने वाले दिनों में सांसदों की गतिविधियों और संभावित बैठकों पर नजर बनाए हुए हैं। फिलहाल यह पूरा मामला राजनीतिक चर्चाओं और सूत्रों के दावों पर आधारित है। किसी भी संभावित टूट या नए गुट के गठन को लेकर आधिकारिक घोषणा का इंतजार किया जा रहा है। संजय/संतोष झा- १५ जून/२०२६/ईएमएस