राष्ट्रीय
15-Jun-2026


दतिया,(ईएमएस)। दतिया जिले में समर्थन मूल्य पर चना खरीदी में बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है, जिसमें उपार्जन समिति, मार्कफेड और वेयरहाउस की मिलीभगत सामने आई है। 15 दिन की पड़ताल के बाद यह उजागर हुआ है कि मोहन सरकार ने 85 हजार क्विंटल चने के लिए 52 करोड़ रुपए का भुगतान कर दिया, लेकिन खरीदे गए चने में 60 से 80 प्रतिशत तक मिट्टी मिली हुई है। वजन बढ़ाने के लिए चने को जानबूझकर गीला कर गोदामों में जमा किया था, जो अब सड़कर पत्थर बन चुका है और इसकी गुणवत्ता इतनी खराब है कि जानवर भी इस चने से मुंह नहीं फेर रहे हैं। यह पूरा घोटाला 12 खरीद केंद्रों पर 2,455 किसानों से 5,875 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदे गए चने से जुड़ा है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस खेल में वे ही दागी अधिकारी शामिल हैं जिन पर पिछले साल 2025 में गेहूं खरीदी में गड़बड़ी के आरोप लगे थे और कुछ के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई थी। राजनीतिक रसूख के चलते इन्हें फिर से करोड़ों की चना खरीदी की जिम्मेदारी सौंप दी गई। उदाहरण के लिए, गोंदन समिति प्रभारी नीरज यादव, जिन पर गेहूं में मिट्टी मिलाने पर एफआईआर हुई थी, ने चना खरीदकर अपने ही परिवार के राजेश्वरी वेयरहाउस में रखवाया। वे एक भाजपा नेता के भतीजे हैं। इसी तरह, गेहूं खरीदी में गड़बड़ी पर सस्पेंड किए गए पूर्व मंत्री के करीबी योकेश दांगी को भी फिर से महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिली। जिला विपणन अधिकारी (डीएमओ) नरेंद्र परमार की भूमिका भी संदिग्ध है, क्योंकि वे ही अंतिम स्वीकृति पत्रक जारी करते हैं और उनके भाई भाजपा के जिला उपाध्यक्ष हैं। आशीष दुबे / 15 जून 2026