भोपाल (ईएमएस)। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि आज के डिजिटल युग में डेटा सबसे मूल्यवान संपत्ति बन गया है और इसकी सुरक्षा राष्ट्र की सीमाओं की सुरक्षा जितनी ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि साइबर तकनीक और उससे जुड़ी चुनौतियों का स्वरूप तेजी से बदल रहा है, ऐसे में डेटा और डिजिटल प्रणालियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। मुख्यमंत्री सोमवार को भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित “राज्य डेटा के लिए साइबर सुरक्षा फ्रेमवर्क को सुदृढ़ बनाने” विषयक कार्यशाला के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने प्रदेश में साइबर सिक्योरिटी रिसर्च सेंटर स्थापित करने की घोषणा की, जो महू स्थित मिलिट्री कॉलेज ऑफ टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग एवं अन्य शैक्षणिक संस्थानों के सहयोग से संचालित होगा। यह केंद्र साइबर सुरक्षा अनुसंधान, नवाचार और कौशल विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने समय रहते साइबर अपराध, डीपफेक और डिजिटल सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों को पहचानकर देश को सजग किया है। उन्होंने कहा कि डिजिटल सेवाओं के विस्तार के साथ नागरिकों के व्यक्तिगत और वित्तीय डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है। कार्यशाला में साइबर अपराध नियंत्रण, डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (डीपीडीपी) अधिनियम, सुरक्षित डिजिटल अवसंरचना और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़ी सुरक्षा चुनौतियों पर विशेषज्ञों ने विचार साझा किए। प्रदेश में 44 साइबर कमांडो और लगभग 3 हजार साइबर वॉरियर तैयार करने की योजना भी प्रस्तुत की गई। कार्यशाला का उद्देश्य राज्य की डिजिटल परिसंपत्तियों और संवेदनशील डेटा की सुरक्षा को और अधिक मजबूत बनाना है। हरि प्रसाद पाल / 15 जून, 2026