- किसान, आरक्षण और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर हंगामे के आसार मुंबई, (ईएमएस)। महाराष्ट्र विधानसभा और विधान परिषद का मानसून सत्र 22 जून से 10 जुलाई 2026 तक मुंबई में आयोजित किया जाएगा। सोमवार को हुई विधिमंडल कार्य सलाहकार समिति की बैठक में सत्र के कार्यक्रम को अंतिम मंजूरी दी गई। राज्यपाल विष्णू देव वर्मा की स्वीकृति के बाद विधानसभा सचिवालय ने इसकी आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है। अधिसूचना के अनुसार, 22 जून को सुबह 11 बजे विधानसभा की कार्यवाही शुरू होगी, जबकि विधान परिषद की बैठक दोपहर 12 बजे प्रारंभ होगी। लगभग तीन सप्ताह तक चलने वाले इस सत्र में कई महत्वपूर्ण विधेयकों और सरकारी प्रस्तावों पर चर्चा तथा मंजूरी की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। - किसानों के मुद्दों पर गरमा सकता है सदन इस बार मानसून सत्र में किसानों से जुड़े मुद्दे प्रमुख रहने की संभावना है। किसान कर्जमाफी योजना में लागू शर्तों, फसल बीमा के लंबित मामलों तथा अरब सागर में एल नीनो के प्रभाव के कारण मानसून की धीमी प्रगति से किसानों के सामने खड़ी हुई चुनौतियों पर विपक्ष सरकार को घेर सकता है। इन विषयों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस होने के आसार हैं। - आरक्षण और बेरोजगारी भी बनेंगे बड़े मुद्दे राज्य में ओबीसी और मराठा आरक्षण को लेकर जारी विवाद भी सत्र के दौरान प्रमुख राजनीतिक मुद्दा रहेगा। इसके अलावा कानून-व्यवस्था की स्थिति, बढ़ती बेरोजगारी और युवाओं से जुड़े सवालों पर दोनों सदनों में जोरदार टकराव देखने को मिल सकता है। विपक्ष इन मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगने की तैयारी में है। - कई महत्वपूर्ण विधेयक होंगे पेश सरकार इस सत्र में कई अहम विधेयकों को पारित कराने की तैयारी कर रही है। इनमें ‘महिला किसान सशक्तिकरण विधेयक-2026’ विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस विधेयक का उद्देश्य महिला किसानों को अधिक अधिकार, सुविधाएं और आर्थिक मजबूती प्रदान करना है। इसके अलावा अन्य विकास एवं प्रशासनिक सुधारों से जुड़े विधेयक भी सदन में पेश किए जाएंगे। बता दें कि पिछले बजट सत्र में विधानसभा ने 29 में से 27 विधेयकों को मंजूरी दी थी और सदन की कार्यवाही 197 घंटे से अधिक चली थी। इसी तरह इस बार भी अधिकतम सरकारी कामकाज निपटाने का लक्ष्य रखा गया है। बहरहाल विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर और विधान परिषद के सभापति राम शिंदे ने उम्मीद जताई है कि मानसून सत्र में भी प्रभावी और सुचारु तरीके से कार्यवाही संचालित की जाएगी तथा लंबित सरकारी कामकाज को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाएगा। लेकिन राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माने जा रहे इस मानसून सत्र में किसानों, आरक्षण, बेरोजगारी और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक जंग देखने को मिल सकती है। - १५ जून/२०२६/ईएमएस