राष्ट्रीय
15-Jun-2026


बेंगलुरु (ईएमएस)। कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खरगे ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत को पत्र लिखकर संगठन की कानूनी स्थिति, वित्तीय स्रोतों, कर अनुपालन और संगठनात्मक ढांचे को लेकर कई सवाल उठाए हैं। खरगे ने मांग की है कि आरएसएस अपनी गतिविधियों और वित्तीय लेनदेन को सार्वजनिक करे तथा अन्य संगठनों की तरह पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करे। पत्र में प्रियांक खरगे ने पूछा है कि आरएसएस किस कानूनी प्रावधान के तहत बिना औपचारिक पंजीकरण के कार्य कर रहा है। उन्होंने संगठन से उसके फंडिंग स्रोत, आय-व्यय का विवरण, प्रशासनिक संरचना और कर भुगतान से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करने का आग्रह किया है। खरगे का कहना है कि जब देश के अन्य सामाजिक और गैर-सरकारी संगठनों को नियमों का पालन करना पड़ता है, तो आरएसएस को भी समान मानकों का पालन करना चाहिए। इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए मोहन भागवत ने कहा कि आरएसएस का गठन वर्ष 1925 में हुआ था और यह एक मान्यता प्राप्त संगठन है। उन्होंने कहा कि कानून के तहत संगठन के लिए पंजीकरण अनिवार्य नहीं है। भागवत ने यह भी कहा कि हिंदू धर्म भी पंजीकृत नहीं है और सरकार तथा न्यायालय दोनों आरएसएस के अस्तित्व और कार्यप्रणाली को मान्यता दे चुके हैं। गौरतलब है कि पिछले कुछ महीनों से प्रियांक खरगे लगातार आरएसएस की वित्तीय पारदर्शिता और कानूनी स्थिति को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। इससे पहले भी उन्होंने संगठन के फंडिंग स्रोतों और कर व्यवस्था की जांच की मांग की थी। इस पत्र के बाद आरएसएस और कांग्रेस के बीच वैचारिक टकराव एक बार फिर चर्चा में आ गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आरएसएस के शताब्दी वर्ष के दौरान उठा यह विवाद राष्ट्रीय राजनीति में नई बहस को जन्म दे सकता है। सुबोध/१५ -०६-२०२६