नई दिल्ली (ईएमएस)। भारत ने अपने स्वदेशी 5वीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर जेट एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एएमसीए) को विकसित करने की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाया है। यह परियोजना भारतीय वायुसेना की घटती स्क्वाड्रन क्षमता और क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। एएमसीए को स्टील्थ तकनीक (रडार से बचाव), सुपरक्रूज़ क्षमता, एडवांस सेंसर फ्यूजन, नेटवर्क-सेंट्रिक युद्ध क्षमता और अत्याधुनिक एवियोनिक्स। इनका उद्देश्य दुश्मन की पकड़ में आए बिना लंबी दूरी तक सटीक हमला करना होता है। यह भारत का पहला पूरी तरह स्वदेशी 5वीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर प्रोजेक्ट है। इसका लक्ष्य भारत को उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल करना है जिनके पास ऐसे उन्नत लड़ाकू विमान हैं। इसके जरिए भारतीय वायुसेना की ताकत और रणनीतिक क्षमता दोनों बढ़ाने की योजना है। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसा फाइटर जेट बनाना केवल डिजाइन का काम नहीं है, बल्कि यह कई स्तरों पर चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया है। इसमें शामिल हैं— एयरक्राफ्ट डिजाइन और एयरोडायनामिक्स स्टील्थ सामग्री और रडार-शैपिंग तकनीक इंजन विकास और थ्रस्ट क्षमता सॉफ्टवेयर-ड्रिवन सिस्टम और AI आधारित युद्ध क्षमता लंबा टेस्टिंग और सर्टिफिकेशन चरण रिपोर्टों के अनुसार, एएमसीए का पहला प्रोटोटाइप आने में अभी कुछ साल लगेंगे और इसके बाद लंबा परीक्षण व उत्पादन चरण होगा। आमतौर पर इस तरह की तकनीक को पूरी तरह विकसित होने में एक दशक से भी अधिक समय लगता है। सुबोध/१५ -०६-२०२६