ज़रा हटके
16-Jun-2026
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वाशिंगटन (ईएमएस)। साल 2006 में अमेरिका के न्यू मैक्सिको की एक खदान में मगरमच्छ का पूर्वज मिलने का दावा वैज्ञानिकों ने किया है। इस विचित्र जीव का नाम लैब्रूजास्यूकस एक्सपेक्टेटस रखा गया है। वैज्ञानिकों ने ऐसे अद्भुत प्राचीन जीव की पहचान की है जो देखने में मगरमच्छ से बिलकुल अलग था। यह जीव लगभग 212 मिलियन साल पहले लेट ट्रायसिक काल में धरती पर मौजूद था और यह मगरमच्छ के परिवार का ही हिस्सा था, लेकिन इसकी शारीरिक बनावट और चलने का तरीका आज के खूंखार मगरमच्छों से बहुत भिन्न था। स्टोनी ब्रुक यूनिवर्सिटी के पेलियोन्टोलॉजिस्ट एलन टर्नर, जो इस अध्ययन के प्रमुख लेखक हैं, ने इस जीव की स्थिति साफ करते हुए साइंटिफिक अमेरिकन को बताया कि यह आधुनिक घड़ियाल और मगरमच्छों का सीधा पूर्वज नहीं था, बल्कि इसे मगरमच्छों का एक बहुत दूर का चचेरा भाई माना जा सकता है। यह विकास की एक अलग शाखा थी जिसने शुवोसॉर नाम के जीवों को जन्म दिया, जो प्राचीन मगरमच्छ के रिश्तेदार थे। इनका शरीर क्रेटेशियस काल के डायनासोरों से काफी मिलता-जुलता था; ये दो पैरों पर चलते थे, छरहरे थे और इनकी चोंच में दांत नहीं होते थे। एलन टर्नर के अनुसार, शुवोसॉर इस कन्वर्जेंट इवोल्यूशन (अभिसारी विकास) का एक शानदार उदाहरण हैं, जहाँ दो बिल्कुल अलग वंशावली वाले जीवों ने जीवित रहने के लिए एक जैसे तरीके अपनाए। मगरमच्छ के रिश्तेदारों के लिए दो पैरों पर चलना एक अनोखा रास्ता था, ठीक वैसे ही जैसे डायनासोर और बाद के पक्षियों ने भी यही रास्ता अपनाया था। यह तरीका स्पष्ट रूप से काफी सफल रहा, जिसके चलते ये जानवर लंबे समय तक धरती पर जिंदा रहे। इस नए जीव का नाम उत्तरी न्यू मैक्सिको के घोस्ट रेंच से पड़ा है, जो दशकों से जीवाश्मों का केंद्र रहा है। इस रेंच का पुराना स्पेनिश नाम रैंचोस डी लॉस ब्रुजोस है, जिसका अर्थ चुड़ैलों का रेंच होता है। इसी से इस जीव के नाम का पहला हिस्सा लैब्रूजा (चुड़ैल) लिया गया है, और इसके साथ ग्रीक शब्द स्यूकस (मगरमच्छ) जोड़ा गया है। प्रजाति का नाम एक्सपेक्टेटस इसलिए रखा गया क्योंकि पेलियोन्टोलॉजिस्ट्स को इस इलाके में पहले ही दो अन्य शुवोसॉर मिल चुके थे, एक पुराना और एक नया, और वे इनके बीच के समय के जीव की उम्मीद कर रहे थे। नेचुरल हिस्ट्री म्यूजियम ऑफ लॉस एंजिल्स काउंटी के नाथन स्मिथ ने बताया, ट्रायसिक काल के शुरुआती और बाद के शुवोसॉर मिलने से हमें पेलियोन्टोलॉजिस्ट्स को एक उम्मीद थी कि इनके बीच के समय का भी कोई जीव जरूर होगा। इस खोज में पैर और बांह की हड्डियां, रीढ़ के हिस्से और अन्य टुकड़े मिले हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार, लैब्रूजास्यूकस पश्चिमी उत्तरी अमेरिका में कम से कम 10 मिलियन सालों तक ऐसा ही रहा। यह खोज उस समय के जानवरों के शरीर में होने वाले बदलावों को समझने में मदद करती है। लैब्रूजास्यूकस अब दुनिया भर में चौथा और उत्तरी अमेरिका में तीसरा पहचाना गया शुवोसॉर है। इससे पहले टेक्सास और अर्जेंटीना में भी इसके नमूने मिल चुके हैं। सुदामा/ईएमएस 16 जून 2026