ज़रा हटके
16-Jun-2026
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वाशिंगटन (ईएमएस)। अंतरिक्ष वैज्ञानिकों द्वारा लगभग पांच दशकों से जिस घटना की केवल परिकल्पना की जा रही थी, अब उसके अस्तित्व की पुष्टि हो गई है। वैज्ञानिकों ने पहली बार हमारी आकाशगंगा मिल्की वे के केंद्र में स्थित सुपरमैसिव ब्लैक होल से निकलने वाली शक्तिशाली हवाओं के प्रत्यक्ष प्रमाण खोजे हैं। वैज्ञानिकों की यह खोज अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है और इससे ब्लैक होल के व्यवहार तथा आकाशगंगाओं के विकास को समझने में नई दिशा मिलेगी। मिल्की वे के केंद्र में स्थित इस विशाल ब्लैक होल को सैजिटेरियस ए-स्टार के नाम से जाना जाता है। वैज्ञानिक लंबे समय से मानते रहे हैं कि ब्लैक होल केवल पदार्थ को निगलते ही नहीं, बल्कि अपने आसपास की गैस और धूल पर प्रभाव डालते हुए ऊर्जा और हवाओं का भी उत्सर्जन करते हैं। हालांकि अब तक सैजिटेरियस ए-स्टार से निकलने वाली ऐसी हवाओं का कोई प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं मिला था। विशेषज्ञों के अनुसार, जब गैस और धूल ब्लैक होल की ओर खिंचती है, तो अत्यधिक गति और गुरुत्वाकर्षण के कारण उसमें भारी ऊर्जा उत्पन्न होती है। यही ऊर्जा आसपास के पदार्थ को बाहर की ओर धकेल सकती है, जिसे वैज्ञानिक “ब्लैक होल विंड्स” कहते हैं। दिलचस्प बात यह है कि सैजिटेरियस ए-स्टार अपेक्षाकृत बहुत कम मात्रा में पदार्थ निगलता है, फिर भी उसमें यह प्रक्रिया सक्रिय पाई गई है। इस रहस्य को सुलझाने के लिए वैज्ञानिकों ने चिली में स्थित अटाकामा लार्ज मिलीमीटर/सबमिलीमीटर एरे (अल्मा) वेधशाला के पांच वर्षों के अवलोकन डेटा का अध्ययन किया। यह वेधशाला 66 अत्याधुनिक रेडियो एंटेना से लैस है और अंतरिक्ष में मौजूद ठंडी गैसों का अत्यंत सूक्ष्म अवलोकन करने में सक्षम है। अध्ययन के दौरान शोधकर्ताओं को सैजिटेरियस ए-स्टार के आसपास मौजूद ठंडी आणविक गैस में लगभग तीन प्रकाश-वर्ष लंबी एक शंकुाकार खाली जगह दिखाई दी। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह क्षेत्र ब्लैक होल से निकलने वाली गर्म हवाओं के कारण बना है, जिन्होंने आसपास की गैस को या तो दूर धकेल दिया या अत्यधिक गर्म कर दिया। शुरुआत में वैज्ञानिकों को संदेह था कि यह प्रभाव आसपास मौजूद तारों की हवाओं के कारण भी हो सकता है। लेकिन विस्तृत गणनाओं से स्पष्ट हुआ कि तारों के पास इतनी ऊर्जा नहीं है कि वे इतनी बड़ी संरचना बना सकें। इसके बाद शोधकर्ताओं ने नासा के चंद्रा एक्स-रे वेधशाला के आंकड़ों का सहारा लिया। जब अल्मा और चंद्रा के डेटा को एक साथ मिलाया गया, तो पाया गया कि जहां गैस में खाली स्थान मौजूद था, वहीं से एक्स-रे उत्सर्जन भी हो रहा था। इससे ब्लैक होल विंड्स की मौजूदगी की पुष्टि हो गई। शोधकर्ताओं का मानना है कि यह हवा संभवतः लगभग 20 हजार वर्षों से बह रही है। हालांकि पृथ्वी के लिए इससे कोई खतरा नहीं है, क्योंकि सैजिटेरियस ए-स्टार हमसे करीब 26 हजार प्रकाश-वर्ष दूर स्थित है। इतनी विशाल दूरी के कारण इसका हमारी पृथ्वी या सौर मंडल पर कोई प्रत्यक्ष प्रभाव नहीं पड़ता। यह खोज इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह अपेक्षाकृत शांत ब्लैक होल के व्यवहार को समझने का दुर्लभ अवसर प्रदान करती है। अधिकांश अध्ययन उन ब्लैक होलों पर केंद्रित रहे हैं जो अत्यधिक सक्रिय होते हैं और बड़ी मात्रा में पदार्थ निगलते रहते हैं। इसके विपरीत, सैजिटेरियस ए-स्टार अपेक्षाकृत शांत अवस्था में है और वैज्ञानिक अब यह जानने का प्रयास कर रहे हैं कि ऐसे ब्लैक होल अपने शांत काल में किस प्रकार कार्य करते हैं। शोधकर्ताओं का मानना है कि इस खोज से यह भी स्पष्ट हुआ है कि हमारी आकाशगंगा का केंद्रीय ब्लैक होल ब्रह्मांड के अन्य सुपरमैसिव ब्लैक होलों की तरह ही व्यवहार करता है। सुदामा/ईएमएस 16 जून 2026