- हॉर्मुज की उम्मीद ने बढ़ाई सप्लाई, किसानों की लागत घटने से उत्पादन बढ़ने का अनुमान नई दिल्ली (ईएमएस)। आमतौर पर स्थानीय मौसम, फसल की पैदावार और मांग-आपूर्ति के समीकरण तय करते हैं कृषि जिंसों की कीमतें लेकिन इस बार गेहूं और सोयाबीन जैसे प्रमुख कृषि उत्पादों के दाम हजारों किलोमीटर दूर पश्चिम एशिया की भू-राजनीति से हिल गए हैं। अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते और हॉर्मुज जलडमरूमध्य के सामान्य होने की उम्मीदों ने इन दोनों जिंसों को वैश्विक बाजारों में चार महीने के निचले स्तर पर धकेल दिया है, जिससे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किसानों और व्यापारियों दोनों की नजरें अब खाड़ी क्षेत्र पर टिकी हैं। एक रिपोर्ट बताती है कि गेहूं की कीमतें गिरकर 5.80 डॉलर प्रति बुशल के करीब पहुंच गई हैं, जो 10 अप्रैल के बाद का न्यूनतम स्तर है। इसके पीछे मुख्य कारण हॉर्मुज जलडमरूमध्य के सुचारु संचालन की संभावना है, जिससे खाद और ईंधन की आपूर्ति आसान होगी, किसानों की लागत घटेगी और अंततः उत्पादन वृद्धि से बाजार में सप्लाई का दबाव बढ़ेगा। हालांकि, यह पूरी तरह से एकतरफा नहीं है; अमेरिका में सूखे की गंभीर स्थिति ने यूएसडीए को शीतकालीन गेहूं उत्पादन अनुमान घटाने पर मजबूर किया है, और फसल की गुणवत्ता भी रिकॉर्ड निचले स्तर पर है, जो संभावित रूप से गिरावट को सीमित कर सकती है। सोयाबीन बाजार भी दबाव में है, जहां कीमतें 11.2 डॉलर प्रति बुशल से नीचे कारोबार कर रही हैं और चार महीने के निचले स्तर पर हैं। इसकी एक बड़ी वजह कच्चे तेल की कीमतों में नरमी है, जिससे बायोफ्यूल की मांग कमजोर पड़ने की आशंका है, क्योंकि सोयाबीन का उपयोग इसमें होता है। इसके अतिरिक्त, अमेरिकी मौसम का फसल के लिए अनुकूल बने रहना, दक्षिण अमेरिका (विशेषकर अर्जेंटीना, जिसका यूएसडीए अनुमान 5 करोड़ टन है) से मजबूत आपूर्ति, दुनिया के सबसे बड़े आयातक चीन की सुस्त मांग और अमेरिकी प्रोसेसिंग प्लांट्स में मरम्मत के चलते धीमी गतिविधियां, सभी मिलकर सोयाबीन की कीमतों पर चौतरफा दबाव बना रहे हैं। यह स्थिति वैश्विक स्तर पर सोयाबीन की प्रचुर उपलब्धता का संकेत दे रही है। कुल मिलाकर कमोडिटी बाजार की नजरें फिलहाल अमेरिका-ईरान समझौते की प्रगति और हॉर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति पर टिकी हैं। यदि खाड़ी क्षेत्र में तनाव कम होता है और कच्चे तेल की कीमतें नरम बनी रहती हैं, तो गेहूं और सोयाबीन दोनों की कीमतों पर मौजूदा दबाव बना रह सकता है। हालांकि, मौसम संबंधी अप्रत्याशित घटनाएं या वैश्विक फसल उत्पादन में कोई बड़ा बदलाव इन जिंसों की कीमतों की दिशा को अचानक बदलने की क्षमता रखते हैं, जिससे व्यापारियों और किसानों दोनों को सतर्क रहने की आवश्यकता है। सतीश/ईएमएस 16 जून 2026