- प्रमाणन दर भी निराशाजनक, नीति-निर्माताओं की चिंता बढ़ी नई दिल्ली (ईएमएस)। राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (एनएसडीसी) अकादमी के कौशल विकास कार्यक्रम भले ही लाखों युवाओं को प्रशिक्षित कर रोजगार दिलाने का दावा करते हों, लेकिन जमीनी हकीकत निराशाजनक है। एनएसडीसी के सार्वजनिक डैशबोर्ड पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इन कार्यक्रमों में दाखिला लेने वाले एक चौथाई से भी कम लोगों को रोजगार मिल पाता है। यह स्थिति कौशल प्रशिक्षण को नौकरी में बदलने की बड़ी चुनौती को दर्शाती है। 8 जून तक के आंकड़ों के मुताबिक एनएसडीसी अकादमी के माध्यम से दाखिला लेने वाले 28.3 लाख उम्मीदवारों में से केवल 6,60,586 को ही नौकरी मिल पाई है, जो लगभग 23 प्रतिशत की रोजगार दर है। इससे भी अधिक चिंताजनक यह है कि दाखिला लेने वालों में से आधे से भी कम (लगभग 14 लाख) उम्मीदवारों को ही प्रमाणपत्र मिल पाए, जो दाखिले के बाद प्रमाणन और फिर नौकरी तक पहुंचने की प्रक्रिया में एक बड़े अंतर को उजागर करता है। वर्ष 2023 में शुरू हुई एनएसडीसी अकादमी का उद्देश्य उच्च शिक्षा के साथ उद्योग-जुड़े कौशल विकास को जोड़ना और रोजगार क्षमता बढ़ाना है। हालांकि, मौजूदा आंकड़े इस पहल की वास्तविक प्रभावशीलता पर सवाल खड़े करते हैं। नीति-निर्माता अब केवल दाखिले की संख्या के बजाय रोजगार सृजन पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, क्योंकि श्रम, कपड़ा और कौशल विकास पर बनी संसदीय स्थायी समिति ने प्लेसमेंट को कौशल-विकास कार्यक्रमों की सफलता का ‘असली पैमाना’ बताया है। ये आंकड़े सरकारी कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। सतीश मोरे/16जून ---