व्यापार
16-Jun-2026


- श्रम बल भागीदारी में भी गिरावट, काम की तलाश करने वालों का अनुपात 54.4 फीसदी हुआ नई ‎दिल्ली (ईएमएस)। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) के नवीनतम मासिक सर्वेक्षण के अनुसार भारत के श्रम बाजार ने मई में एक चिंताजनक प्रवृत्ति प्रदर्शित की है, जिसमें बेरोजगारी दर (यूआर) 11 महीने के उच्चतम स्तर 5.5 प्रतिशत पर पहुंच गई है। यह वृद्धि अप्रैल के 5.2 प्रतिशत से हुई है। विशेष रूप से महत्वपूर्ण यह है कि यह श्रम बल भागीदारी दर (एलएफपीआर) में गिरावट के बावजूद दर्ज की गई है, जो काम करने या काम की तलाश करने वाले लोगों के अनुपात में कमी का संकेत देती है। यह डेटा देश में रोजगार परिदृश्य की अंतर्निहित कमजोरी को उजागर करता है। आंकड़ों के मुताबिक मई में एलएफपीआर घटकर 54.4 प्रतिशत रह गई, जो पिछले 11 महीनों का सबसे निचला स्तर है, जबकि अप्रैल में यह 55 प्रतिशत थी। इसी तरह, रोजगार प्राप्त लोगों का अनुपात भी अप्रैल के 52.2 प्रतिशत से घटकर मई में 51.4 प्रतिशत पर आ गया, जो एक और 11 महीने का निचला स्तर है। एनएसओ के विश्लेषण के अनुसार कामकाजी आबादी और रोजगार प्राप्त लोगों के अनुपात में कमी तथा बेरोजगारी में वृद्धि से स्पष्ट होता है कि मई के दौरान श्रम बाजार की स्थिति कमजोर हुई है। यह दर्शाता है कि रोजगार के अवसरों में गिरावट, काम की तलाश करने वालों की संख्या में कमी की तुलना में अधिक तेज रही है, जिससे कुल बेरोजगारों का अनुपात बढ़ गया है। आर्थिक गतिविधियों में मौसमी सुस्ती भी इसकी एक संभावित वजह मानी जा रही है। क्षेत्रीय और लिंग-विशिष्ट विश्लेषण से भी महत्वपूर्ण रुझान सामने आए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में एलएफपीआर अप्रैल के 57.5 प्रतिशत से घटकर मई में 56.6 प्रतिशत रह गई, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह मामूली गिरावट के साथ 50.1 प्रतिशत से 49.8 प्रतिशत पर आई है। ग्रामीण बेरोजगारी दर में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है, जो अप्रैल के 4.6 प्रतिशत से बढ़कर मई में 5.1 प्रतिशत हो गई। वहीं, शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी दर 6.6 प्रतिशत से घटकर 6.4 प्रतिशत हुई, जो एक विरोधाभासी प्रवृत्ति को दर्शाता है। पुरुषों और महिलाओं दोनों के रोजगार अनुपात में गिरावट दर्ज की गई है, और दोनों के लिए बेरोजगारी दर में वृद्धि हुई है, जो व्यापक श्रम बाजार तनाव की ओर इशारा करता है। यह समग्र डेटा भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक जटिल चुनौती प्रस्तुत करता है, जहां नौकरी के अवसर अपर्याप्त बने हुए हैं और श्रम बल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा निष्क्रिय हो रहा है। सतीश मोरे/16जून ---