- सख्त नियम जारी, 1 जनवरी 2027 से होंगे लागू, डिजिटल मार्केटिंग भी दायरे में मुंबई (ईएमएस)। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने वित्तीय उत्पादों एवं सेवाओं की भ्रामक बिक्री (मिस-सेलिंग) और आक्रामक बिक्री प्रथाओं पर लगाम लगाने के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। ये नए सिद्धांत-आधारित नियम 1 जनवरी, 2027 से लागू होंगे, जिनका लक्ष्य उपभोक्ताओं को गलत जानकारी और अनुचित बिक्री दबाव से बचाना है। दिशानिर्देशों के तहत सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर और सभी डिजिटल मार्केटिंग मध्यस्थ भी दायरे में आएंगे, क्योंकि ये नियम माध्यम-निरपेक्ष दृष्टिकोण पर आधारित हैं। केंद्रीय बैंक ने बैंकों और वित्तीय संस्थाओं को आक्रामक बिक्री को बढ़ावा देने वाले प्रोत्साहन ढांचे से दूर रहने को कहा है। विनियमित संस्थाएं (आरई) अपने कर्मचारियों को प्रोत्साहन दे सकती हैं, पर यह सुनिश्चित करना होगा कि वे गलत बिक्री को बढ़ावा न दें। साथ ही, तीसरे पक्ष द्वारा आरई कर्मचारियों को प्रोत्साहन देने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। आरबीआई ने स्पष्ट किया कि सभी विज्ञापन, विपणन और बिक्री के लिए अंतिम जिम्मेदारी संबंधित आरई की होगी, चाहे वे सीधे एजेंट या आउटसोर्स व्यवस्था से हों। प्रचार या ग्राहक जोड़ने के लिए नियुक्त इन्फ्लूएंसर, सहयोगी और अन्य डिजिटल मार्केटिंग मध्यस्थ अब डायरेक्ट सेलिंग एजेंट (डीएसए) या डायरेक्ट मार्केटिंग एजेंट (डीएमए) की श्रेणी में माने जाएंगे। यह कदम वित्तीय उत्पादों की गलत बिक्री के बढ़ते मामलों पर अंकुश लगाने और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए उठाया गया है, जिस पर फरवरी में मसौदा दिशानिर्देश जारी किए गए थे। सतीश मोरे/16जून ---