क्षेत्रीय
16-Jun-2026
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नि:शुल्क शिक्षा की मिसाल को संवारने आगे आए समाज के हाथ बालाघाट (ईएमएस). शहर के देवटोला में दो दशक पहले बरगद के पेड़ के नीचे शुरू हुआ नि:शुल्क शिक्षा का छोटा सा प्रयास अब एक नए मुकाम की ओर बढ़ चला है। वर्षों का संघर्ष, समर्पण और सेवा भाव अब रंग लाने लगा है। कच्चे मकान में चल रहा गुरुकुल स्कूल अब जल्द ही पक्के भवन में परिवर्तित होगा। मंगलवार को वैदिक विधि-विधान के साथ भूमिपूजन कर इस सपने को साकार करने की दिशा में पहला ठोस कदम उठाया गया। देवटोला में संचालित नि:शुल्क गुरुकुल स्कूल, जो पिछले करीब 20 वर्षों से हजारों बच्चों को शिक्षा प्रदान कर रहा है, अब अपने नए भवन की ओर अग्रसर है। मंगलवार को स्कूल परिसर में विधिवत पूजा-अर्चना के साथ भवन निर्माण का भूमिपूजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, व्यापारी, सामाजिक कार्यकर्ता और नागरिक उपस्थित रहे। गौरतलब है कि वर्ष 2006 में अशोक बोहने और पायल लिल्हारे ने कुछ बच्चों को बरगद के पेड़ के नीचे पढ़ाकर इस गुरुकुल की नींव रखी थी। इसके बाद किराये के कच्चे मकान में स्कूल संचालित होता रहा, जहां आसपास के गांवों के बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा दी जाती रही। संघर्ष, समर्पण और सेवा की अनोखी मिसाल बीते 20 वर्षों में इस गुरुकुल ने अनेक उतार-चढ़ाव देखे, लेकिन संस्थापकों और शिक्षकों के समर्पण ने इसे निरंतर आगे बढ़ाया। यहां शिक्षक भी बिना किसी शुल्क के बच्चों को पढ़ाने में सहयोग करते रहे। आर्थिक संसाधनों की कमी के बावजूद शिक्षा की यह अलख कभी बुझने नहीं दी गई। समाज के सहयोग से साकार होगा सपना भूमिपूजन के अवसर पर समाज के विभिन्न वर्गों ने आगे आकर आर्थिक सहयोग, निर्माण सामग्री और अन्य सहायता देने का संकल्प लिया। महिलाओं और व्यापारियों ने भी उदारतापूर्वक दान देकर इस मुहिम को मजबूती दी। सभी ने इसे जनभागीदारी का अभियान बनाकर जल्द भवन निर्माण पूरा करने का संकल्प लिया। ‘गुरुकुल नहीं, यह एक तपस्या है’ पूर्व नपा अध्यक्ष रमेश रंगलानी ने कहा कि यह गुरुकुल स्कूल समाज के लिए प्रेरणा है और इसमें योगदान देना सौभाग्य की बात है। वहीं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जिला संघ चालक वैभव कश्यप ने कहा कि यहां आकर उन्हें मंदिर जैसा सुकून मिलता है। उन्होंने अशोक बोहने और पायल लिल्हारे के समर्पण को तपस्या बताते हुए कहा कि उनका जीवन इस कार्य में समर्पित रहा है। कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि सपने अधूरे रह सकते हैं, लेकिन मजबूत संकल्प हमेशा पूरे होते हैं। वर्ष 2006 से शुरू हुए इस संघर्ष को देखने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी विश्वास जताया कि अब सामूहिक प्रयास से गुरुकुल का पक्का भवन जल्द ही तैयार होगा। इस अवसर पर पूर्व नपा अध्यक्ष रमेश रंगलानी, सुरेश कोचर, सुरेश रंगलानी, अमर सिंह ठाकुर, मीना चावड़ा, सुधीर तोमर, हरीश लिल्हारे, प्रशन्न कांकरिया, रितेश अग्रवाल, सुभाष गुप्ता, महफूज अली, अजय ठाकुर, प्रवीण ठोबरे, श्रेयांश वैध, रूपेश दुबे, राधिका आसाटी, भूमेश्वरी, तिवड़े, रजनी मोहारे, शालिनी टोंक, राजवंती दामाहे, आरती बघेले, विमला पिछोड़े सहित अनेक गणमान्य नागरिक, महिलाएं और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। भानेश साकुरे / 16 जून 2026