लेख
19-Jan-2026
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चीन में भ्रष्टाचार के खिलाफ जारी अभियान ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है। वर्ष 2025 में चीन ने लगभग 10 लाख लोगों को भ्रष्टाचार के आरोप में गिरफ्तार किया और उनमें से 9.83 लाख दोषी ठहराए गए। जो अब सजा भुगत रहे हैं। यह कार्यवाही सिर्फ संख्या दर्शानी वाली नहीं है, बल्कि उस राजनीतिक इच्छाशक्ति का प्रमाण है जिसके दम पर चीन ने अपनी प्रशासनिक व्यवस्था को भ्रष्टाचार से मुक्त करने और बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था बनाने की दिशा में काम करने में सफल हुआ है। 2012 में शी जिनपिंग के सत्ता में आने के बाद से भ्रष्टाचार उन्मूलन का काम शुरू हुआ। इस अभियान में अब तक 72 लाख से अधिक मामलों की जांच हो चुकी है। बैंकिंग, रक्षा, स्वास्थ्य, ऊर्जा, सरकारी और निजी कंपनियां इत्यादि का कोई भी क्षेत्र कार्यवाही से अछूता नहीं रहा। चीन में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई की खास बात यह है, यहां “बड़ा आदमी” या “महत्वपूर्ण पद” पर बैठे लोग भी भ्रष्टाचारियों का बचाव नहीं कर पाते हैं। 2025 में चीन के 69 शीर्ष अधिकारी ,केंद्रीय मंत्री स्तर से लेकर प्रांतीय प्रमुखों के पदों पर बैठे हुए लोगों को भ्रष्टाचार के आरोप प्रमाणित होने के बाद सजा दी गई है। सेंट्रल कमीशन फॉर डिसिप्लिन इंस्पेक्शन और नेशनल कमीशन ऑफ सुपरविजन के जरिए पार्टी और सरकार ने यह संदेश दिया है, महत्वपूर्ण पद पर बैठे हुए लोगों को सत्ता को पिंजरे में रखना जरूरी है। टीवी डॉक्यूमेंट्री के जरिए भ्रष्टाचार के तरीकों और दोषियों के कबूलनामों को चीन में सार्वजनिक किया जा रहा है। इसके कारण भ्रष्टाचारियों में भारी भय व्याप्त है। आम जनता सजग हुई है। वह शिकायत करने के लिए अब सामने आ रही है। भारत में ठीक इसके विपरीत स्थिति है। भ्रष्टाचारी यदि सत्ता पक्ष का है तो उसके बचाव करने के लिए पूरा शासन और प्रशासन तंत्र सामने आ जाता है। 2014 के बाद से सत्ता पर बैठे हुए लोग और प्रशासनिक पदों पर बैठे हुए लोगों के खिलाफ भारत में कोई कार्यवाही नहीं हो पाई है जो कार्रवाई हो रही है वह छोटे-छोटे पदों में बैठे हुए लोगों के खिलाफ हो रही है। भारत में भ्रष्टाचार कॉरपोरेट तरीके से सत्ता का संरक्षण प्राप्त है। भारत में भ्रष्टाचार के मामले अक्सर दर्ज ही नहीं होते हैं, वर्षों तक जांच के नाम पर लटके रहते हैं। बड़े नेता और अफसर कानूनी जटिलताओं, राजनीतिक संरक्षण और “वाशिंग मशीन” जैसी प्रक्रियाओं से बचे रहते हैं। नतीजा यह कि भारत की आम जनता छोटे-छोटे से कामों के लिए भ्रष्टाचार की चक्की में पिस रही है। भारत में नौकरशाही के साथ-साथ अब न्यायपालिका के ऊपर भी भ्रष्टाचार के आरोप बड़े पैमाने पर लग रहे हैं। राजनीतिक, प्रशासनिक एवं न्यायपालिका में जिस तरह से भ्रष्टाचार फैल रहा है उसको लेकर आम जनता में सिस्टम पर भरोसा कमजोर होता जा रहा है। भारतीय दंड संहिता में जो नए प्रावधान किए गए हैं, उसके अनुसार शासन की अनुमति के बिना भ्रष्टाचार की शिकायतों पर कार्रवाई संभव ही नहीं है। भारत में एफआईआर दर्ज न होने से सरकार और उसके अधिकारी अपने आप को ईमानदार बताने का कोई मौका नहीं छोड़ते हैं। आंकड़ों को बेहतर दिखाने और भ्रष्टाचार मुक्त बताने के लिए सरकार स्वयं भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने का काम करती है। जिसके कारण भारत में भ्रष्टाचार दिन-प्रतिदिन बढ़ता ही चला जा रहा है। चीन का उदाहरण दिखाता है, भ्रष्टाचार से लड़ाई सिर्फ कानून बनाने से नहीं हो सकती है। भ्रष्टाचार के खिलाफ शिकायत और उसकी जांच बिना अपवाद, जांच करने एवं कठोर कार्यवाही करने से भ्रष्टाचार को नियंत्रित किया जा सकता है। चीन में सरकार भ्रष्टाचार के मामलों से घबराती नहीं है। वह बेहतर शासन देने के लिए भ्रष्टाचारियों पर बिना किसी भेदभाव के कठोर कार्यवाही कर रही है। यह संदेश जनता को देती है। बिना किसी भेदभाव के भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्यवाही करने के कारण चीन में सरकार की इमेज आम जनता में बहुत अच्छी है। चीन में भ्रष्टाचार करने से प्रमुख पदों पर बैठे हुए लोग डरने लगे हैं। यह स्थिति भारत में एक बार 1975 से 1977 के बीच में जब आपातकाल लगा था तब देखी गई थी। उस समय शासन और प्रशासन के सभी तंत्र भ्रष्टाचार और कानून विरोधी काम करने से डर रहे थे। भारत में यदि भ्रष्टाचार सचमुच कम करना है तो शुरुआत राजनीतिक ईमानदारी से करनी होगी। खासकर चुनावी खर्च और सत्ता के संरक्षण में जिस तरह का भ्रष्टाचार हो रहा है उसको तुरंत नियंत्रित करने की जरूरत है। जहां सरकार के मुखिया का संकल्प मजबूत होता है, वहां सिस्टम सुधरता है। इस बात का प्रमाण आपातकाल का दौर था। चीन ने यह करके दिखाया है। बिना किसी भेदभाव के सख्ती और निरंतर कार्रवाई करने से भ्रष्टाचार पर लगाम लगाई जा सकती है। पिछले 11 वर्षों में भारत में केवल विपक्षियों के ऊपर कारवाई हो रही है। सत्ता पक्ष और सत्ता पक्ष से जुड़े हुए अधिकारियों और न्याय व्यवस्था से जुड़े हुए लोगों के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं होने से भारत में भ्रष्टाचार लगातार बढ़ता चला जा रहा है। चीन में जो भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई हो रही है, भारत के लिए वह एक सबक है। कानून सबके लिए बराबर हो, तभी लोकतंत्र और शासन तथा सामाजिक व्यवस्था मजबूत होगी। किसी भी देश का विकास तभी संभव है जब सभी पक्ष ईमानदारी से अपना काम करें। चीन ने यह करके दिखा दिया है। ईएमएस / 19 जनवरी 26