* नर्मदा के नीलकंठधाम–पोइचा में सूचना विभाग के अधिकारियों का मंथन, जनकल्याण योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने पर जोर गांधीनगर (ईएमएस)| मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की अध्यक्षता में वलसाड जिले के धरमपुर में आयोजित राज्य स्तरीय चिंतन शिविर के बाद अब विभिन्न विभागों की अलग-अलग चिंतन बैठकों का आयोजन किया जा रहा है। इसी क्रम में नर्मदा जिले के नीलकंठधाम-पोइचा में 13 और 14 फरवरी को सूचना विभाग की दो दिवसीय चिंतन शिविर का शुभारंभ हुआ। इस शिविर में राज्यभर से सूचना विभाग के वर्ग-1 और वर्ग-2 के अधिकारी शामिल हुए हैं। शिविर का उद्देश्य जनकल्याणकारी योजनाओं को समाज के अंतिम व्यक्ति तक अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचाने के लिए बदलते संचार माध्यमों, डिजिटल तकनीक के उपयोग और उससे जुड़ी चुनौतियों पर मंथन करना है। शब्द की गरिमा ही विभाग का ‘परम धर्म’ शिविर के उद्घाटन अवसर पर सूचना आयुक्त के. एल. बचाणी ने अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि डिजिटल तकनीक ने विश्वभर की जानकारी को सहज और सुलभ बना दिया है। ऐसे समय में यह सुनिश्चित करना सूचना विभाग की जिम्मेदारी है कि सरकार की कोई भी योजना या निर्णय जब अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे, तो उसमें किसी प्रकार की त्रुटि या भ्रम न हो। उन्होंने शिविर की टैगलाइन ‘सेवा ही साधना, शब्द की आराधना’ का उल्लेख करते हुए कहा कि सूचना विभाग का संपूर्ण कार्य शब्दों के इर्द-गिर्द बुना हुआ है। ‘ध्रु’ धातु से बने ‘धर्म’ शब्द का संदर्भ देते हुए उन्होंने कहा कि जो धारण करने योग्य है वही धर्म है, और सूचना विभाग के लिए शब्द की गरिमा बनाए रखना ही उसका परम धर्म है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रेरक मंत्र ‘स्वान्तः सुखाय – जनकल्याण में ही आनंद’ का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जब किसी प्रेस विज्ञप्ति को पढ़कर कोई नागरिक योजना का लाभ प्राप्त करता है, किसी प्रकाशन से प्रेरित होकर कोई महिला ‘ड्रोन दीदी’ बनती है या कोई युवा स्टार्टअप शुरू करता है, तब मिलने वाला आत्मसंतोष अवर्णनीय होता है। उन्होंने कहा कि सूचना विभाग की भूमिका केवल योजनाओं के प्रचार-प्रसार तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकार और जनता के बीच विश्वास का सेतु निर्माण करना भी है। इसलिए सूचना का प्रस्तुतिकरण प्रासंगिक, प्रभावी और विश्वसनीय होना चाहिए। डिजिटल युग में ‘जनसेवा’ की नई जिम्मेदारी उन्होंने अधिकारियों को प्रेरित करते हुए कहा कि लोगों की रुचि और आवश्यकताओं को समझते हुए राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी जन-जन तक पहुंचाने के लिए टीम सूचना को और अधिक सशक्त बनना होगा। डिजिटल युग में विभाग की जिम्मेदारी केवल सूचना प्रसारण की नहीं, बल्कि जनसेवा और जनजागृति की भी है। नर्मदा तट पर आयोजित यह चिंतन शिविर अधिकारियों को नई ऊर्जा और नए विचारों के साथ आगे बढ़ने का अवसर प्रदान करेगा, ऐसा विश्वास भी उन्होंने व्यक्त किया। ‘काम को पसंद करो या पसंद का काम करो’ – दीपक तेरैया प्रशिक्षक एवं लाइफ कोच दीपक तेरैया ने ‘काम को पसंद करो या पसंद का काम करो’ विषय पर प्रेरक वक्तव्य दिया। उन्होंने कहा कि अक्सर हमें वही काम नहीं मिलता जो हमें पसंद हो, और जो काम मिलता है वह पसंद नहीं होता। यही द्वंद्व तनाव का कारण बनता है। उन्होंने कहा कि परिस्थितियां हमेशा मनचाही नहीं होतीं, लेकिन दृष्टिकोण बदलकर काम को बोझ नहीं बल्कि सीखने का अवसर मान लिया जाए तो वही काम जादुई साबित हो सकता है। उन्होंने स्वास्थ्य, संपत्ति, करियर और संबंधों के बीच संतुलन बनाए रखने पर जोर देते हुए कहा कि जिस दिन व्यक्ति सीखना बंद कर देता है और स्वयं से संवाद करना छोड़ देता है, उसी दिन उसकी प्रगति रुक जाती है। प्रतिस्पर्धा दूसरों से नहीं, बल्कि अपने ही ‘कल’ से होनी चाहिए। काव्यात्मक प्रस्तुति से जीवन का संदेश कार्यक्रम में कवि कृष्ण दवे ने काव्य पाठ के माध्यम से जीवन के मूल्यों को भावपूर्ण शैली में प्रस्तुत किया। दो दिवसीय यह चिंतन शिविर सूचना अधिकारियों के लिए आत्ममंथन, नवाचार और जनसंपर्क को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। सतीश/13 फरवरी