नई दिल्ली (ईएमएस)। पलूशन के जरिए शरीर में पहुंचने वाले हैवी मेटल्स मस्तिष्क को नुकसान पहुंचा रहे हैं। इससे याददाश्त कमजोर हो रही है और अल्जाइमर का खतरा बढ़ रहा है। विशेषज्ञों ने पाया कि प्रदूषित हवा और पानी इन हैवी मेटल्स को हमारे शरीर तक पहुंचाते हैं। पलूशन के कारण हवा और खानपान के जरिए शरीर में पहुंच रहे भारी धातु मस्तिष्क को प्रभावित कर रहे हैं। इससे सोचने-समझने की क्षमता और याददाश्त कमजोर हो रही है। एम्स दिल्ली के एक शोध के अनुसार, हवा, पानी और भोजन के जरिए लिथियम, एल्युमिनियम और कोबाल्ट जैसे भारी धातु हमारे शरीर में प्रवेश कर रहे हैं। इससे सोचने-समझने की क्षमता और याददाश्त कमजोर हो रही है। वैज्ञानिकों ने पाया कि भूलने की बीमारी (अल्जाइमर) से पीड़ित बुजुर्गों के खून में इन धातुओं का स्तर सामान्य से कहीं अधिक था। एम्स के बायोफिजिक्स विभाग के विशेषज्ञों ने तीन विभागों के डॉक्टरों और विशेषज्ञों के साथ मिलकर शोध किया। यह शोध जर्नल ऑफ ट्रेस एलिमेंट्स इन मेडिसिन एंड बायोलॉजी में प्रकाशित भी हुआ है। बायोफिजिक्स विभाग की प्रोफेसर डॉ. शर्मिष्ठा डे ने बताया कि 60 से अधिक उम्र के 65 लोगों और सामान्य लोगों पर अध्ययन किया गया। जांच में पाया गया कि कमजोर याददाश्त और भूलने की बीमारी से पीड़ित लोगों के खून में लिथियम, एल्युमिनियम, वैनेडियम, मैंगनीज, कोबाल्ट, निकेल, जिंक, सिल्वर जैसे धातु का स्तर सामान्य लोगों की तुलना में अधिक था। शोध के अनुसार, मस्तिष्क भारी धातु को नियंत्रित करता है, लेकिन कई कारणों से इसका स्तर बढ़ सकता है, जो अल्जाइमर का कारण बन सकता है। अजीत झा/देवेन्द्र/नई दिल्ली/ईएमएस/14/फरवरी/2026