नई दिल्ली (ईएमएस)। पिछले काफी समय से भारतीय टीम में वापसी करने में असफल रहे अनुभवी तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी ने बंगाल की ओर से रणजी ट्रॉफी सेमीफाइनल में आठ विकेट लेकर चयनकर्ताओं को करारा जवाब दिया है। शमी ने हाथ में पट्टी बांधकर जिस प्रकार 22.1 ओवर में 90 रन देकर आठ विकेट लिए। उससे उनका फार्म और फिटनेस दोनो ही साबित हुए हैं। ये उनके प्रथम श्रेणी करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। शमी की इस गेंदबाजी से ही बंगाल को जम्मू-कश्मीर के खिलाफ सेमीफाइनल में पहली पारी में 26 रन की बढ़त मिली। अब फाइनल में बंगाल और कर्नाटक का मुकाबला होने की संभावना है। दूसरे और तीसरे दिन शमी ने जबरदस्त गेंदबाजी की। शमी ने पांच विकेट लेने के बाद सटीक लाइन-लेंथ के साथ तीन विकेट और निकाले। इस प्रकार कुल आठ विकेट झटके। इस दौरान उनकी तेज गेंदबाजी में धार देखी गयी। 35 साल की उम्र में, बिना किसी बीसीसीआई के केन्द्रीय अनुबंध और राष्ट्रीय टीम से बाहर होने के बाद बाद भी शमी ने उम्मीद नहीं छोड़ी है। उन्होंने एक बार फिर अपने प्रदर्शन से चयनकर्ताओं को उनकी ओर ध्यान देने मजबूर किया है। बीसीसीआई के मुख्य चयनकर्ता अजीत आगरकर और शमी के बीच पिछले एक साल में फिटनेस को लेकर मतभेद रहे हैं। आगरकर का मानना है कि शमी पांच दिवसीय क्रिकेट के लिए पूरी तरह फिट नहीं हैं पर शमी हर बार अपने प्रदर्शन से जवाब देते आए हैं। इस बार भी शायद वह यही दिखाना चाहते हैं। बंगाल ने 249/5 से आगे खेलते हुए 328 रन बनाए। सुदीप घरामी की 146 रनों की पारी खेली जबकि आकिब नबी ने 5/87 लेकर प्रभावित किया। नबी ने इस सीजन में रणजी ट्रॉफी में अपने 50 विकेट भी पूरे किए लेकिन जब जम्मू-कश्मीर ने जवाबी पारी शुरू की, तो मैच पर पूरी तरह शमी हावी रहे। दूसरे दिन नई गेंद से शमी ने शुबहम खजूरिया और यावर हसन को जल्दी आउट कर जम्मू-कश्मीर को 13/2 पर ला दिया और बाद में उन्होंने पारस डोगरा और अब्दुल समद के बीच 147 रनों की खतरनाक साझेदारी को तोड़ा। समद (82) और डोगरा (58) दोनों को आउट कर शमी ने मैच का रुख पलट दिया। डोगरा ने अपनी पारी के दौरान रणजी ट्रॉफी में 10,000 रन भी पूरे किए. गिरजा/17 फरवरी ईएमएस 2026