कोर्ट ने आरोपों को गंभीर श्रेणी का पाते हुए राहत से किया इनकार छिंदवाड़ा (ईएमएस)। कोयलांचल परासिया के चर्चित और देश भर में सुर्खियों में रहे कफ सिरप कांड में आरोपियों को अदालत से राहत नहीं मिल सकी। मंगलवार को हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति प्रमोद कुमार अग्रवाल की एकलपीठ ने जिले के बहुचर्चित जहरीले कफ सीरप कांड के आरोपी डॉ. प्रवीण सोनी सहित अन्य की जमानत अर्जियां निरस्त कर दीं। कोर्ट ने आरोपों को गंभीर श्रेणी का पाते हुए राहत से इनकार कर दिया। दो फरवरी को कोर्ट ने सुनवाई पूरी करने के साथ आदेश सुरक्षित कर लिया था, जिसे मंगलवार को सुनाया गया। दरअसल, तमिलनाडु की सन फार्मा कंपनी द्वारा बनाये गए कोल्ड्रिफ कफ सररप को पीने से छिंदवाड़ा और उसके आसपास के जिलों के कुल २४ बच्चों की मौत हुई थी। दवा के रूप में ये कफ सीरप परासिया के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रवीण सोनी द्वारा लिखे गए थे। इस कफ सीरप को पीने से सर्दी-जुकाम से पीड़ित बच्चों की पहले किडनी फेल हुईं और फिर उनकी मौत हो गई थी। मृत बच्चों की ओर से की गई थी आपत्ति जहरीले कफ सीरप को पीकर अपनी जान गंवाने वाले २४ बच्चों की ओर से महिला अधिवक्ता अश्मिता चांद ने हाई कोर्ट में आपत्ति दायर की थी। उनका कहना था कि जहरीले कफ सिरप ने मासूम बच्चों की जिंदगियां छीनने वाले वाले आरोपितों को जमानत का लाभ न दिया जाए। रिपोर्ट में घातक रसायन की हुई थी पुष्टि इस मामले में सामने आई रिपोर्ट में कफ सिरप में घातक रसायन पाए जाने की पुष्टि हुई थी। इसके बाद प्रशासन और जांच एजेंसियों ने कार्रवाई तेज करते हुए आरोपियों पर शिकंजा कसना शुरू किया। मामले में लगातार नए तथ्य सामने आ रहे हैं, जिससे जांच का दायरा भी बढ़ता जा रहा है। सरकार ने किया था कड़ा विरोध सुनवाई के दौरान आरोपी की ओर से दायर जमानत अर्जियों का राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता हरप्रीत सिंह रूपराह व शासकीय अधिवक्ता सीएम तिवारी ने कड़ा विरोध किया था। उनकी दलील थी कि डॉ. सोनी द्वारा लिखा गया कफ सीरप उसकी पत्नी ज्योति के मेडिकल स्टोर से ही यह कफ सिरप बिकता था। पैसों की लालच में यह षड्यंत्र रचा गया। जहरीले कफ सिरप से २४ बच्चों की जाने गईं। इसलिए आरोपियों को जमानत न दी जाए। ईएमएस/ मोहने/ 17 फरवरी 2026