गुना (ईएमएस)। नगर पालिका परिषद गुना में अवैध निर्माण को लेकर लंबे समय से उठते सवालों के बीच नपाध्यक्ष सविता अरविन्द गुप्ता ने खुलकर मोर्चा संभाल लिया है। शहर के बीचोंबीच भाजपा के दबंग पार्षद की बैजू चौराहे पर बिना अनुमति चल रहे चार मंजिला व्यवसायिक निर्माण के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए नपाध्यक्ष ने न केवल मुख्य नगर पालिका अधिकारी को पत्र लिखा, बल्कि पूरे शहर में अवैध निर्माणों पर पारदर्शी और निष्पक्ष कार्रवाई के निर्देश देकर यह स्पष्ट कर दिया है कि नियम सबके लिए समान हैं, चाहे व्यक्ति कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो। नपाध्यक्ष द्वारा भेजे गए पत्र में यह साफ तौर पर उल्लेख किया गया है कि बैजू चौराहे जैसे व्यस्त और संवेदनशील क्षेत्र में पिछले सात-आठ माह से बिना किसी वैधानिक अनुमति के बहुमंजिला निर्माण कार्य चल रहा है। गंभीर बात यह है कि अब तक नगर पालिका के किसी भी अधिकारी, कर्मचारी, अतिक्रमण दस्ते या संबंधित वार्ड के उपयंत्री द्वारा इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। नपाध्यक्ष ने इसे नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिन्ह बताते हुए जवाबदेही तय करने की बात कही है। अपने पत्र में नपाध्यक्ष ने यह भी रेखांकित किया कि आम नागरिकों के छोटे-छोटे निर्माण कार्यों पर तत्काल नोटिस और कार्रवाई हो जाती है, लेकिन जब बात प्रभावशाली लोगों की आती है तो नियमों को नजरअंदाज कर दिया जाता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अध्यक्ष पद पर होने के बावजूद उन्होंने स्वयं अपने आवास के निर्माण के लिए नियमानुसार अनुमति ली थी। ऐसे में नियमों की खुलेआम अवहेलना न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि नगर पालिका की साख को भी नुकसान पहुंचा रही है। नपाध्यक्ष की इस सख्ती को केवल एक निर्माण तक सीमित नहीं रखा गया है। पत्र में एबी रोड, सदर बाजार, अशोक नगर रोड, आरोन बीजी रोड और बूढ़े बालाजी रोड जैसे प्रमुख इलाकों में चल रहे अवैध निर्माण कार्यों पर भी सात दिवस के भीतर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी गई है। इसके साथ ही वार्डवार निरीक्षण कर बिना किसी दबाव के तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। नपाध्यक्ष ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि आवश्यकता पड़ी तो जिला प्रशासन और कलेक्टर से सहयोग लिया जाएगा। फिलहाल नपाध्यक्ष के टारगेट पर वह भाजपा के ही पार्षद हैं जो लंबे समय से नपा में उनका विरोध कर रहे हैं। यह पूरा घटनाक्रम उस समय सामने आया है जब पहले ही बैजू चौराहे के इसी निर्माण को लेकर विधायक स्तर पर भी आपत्ति जताई जा चुकी है। इसके बावजूद कार्रवाई न होना यह दर्शाता है कि नगरपालिका में कहीं न कहीं प्रशासनिक ढिलाई रही है। ऐसे में नपाध्यक्ष का खुलकर सामने आना यह संदेश देता है कि वे केवल औपचारिक अध्यक्ष नहीं, बल्कि व्यवस्था में सुधार लाने के लिए सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। इसके पहले भी नपाध्यक्ष ने रेलवे स्टेशन रोड चौड़ीकरण में बाधा बने अतिक्रमण को लेकर सख्त कदम उठाते हुए जिला प्रशासन को पत्र लिखा था। लगातार सामने आ रहे इन मामलों से यह स्पष्ट होता है कि नपाध्यक्ष विकास कार्यों में बाधा बनने वाले अतिक्रमण और अवैध निर्माण के खिलाफ किसी भी स्तर पर समझौता करने के मूड में नहीं हैं।- सीताराम नाटानी