:: आईआईटी गुवाहाटी के सहयोग से आयोजित हुई सात दिवसीय वर्कशॉप; छात्रों ने खुद तैयार किए भविष्य के चिप डिजाइन :: इन्दौर (ईएमएस)। इन्दौर के प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग कॉलेज एसजीएसआईटीएस ने भारत को चिप डिजाइनिंग के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ी पहल की है। संस्थान के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं इंस्ट्रुमेंटेशन इंजीनियरिंग विभाग ने आईआईटी गुवाहाटी (नाइन लैब्स) के सहयोग से वीएलएसआई डिजाइन पर एक सप्ताह की गहन कार्यशाला का सफल आयोजन किया। भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा वित्तपोषित यह कार्यक्रम शिक्षा मंत्रालय की विशेष पहल के तहत आयोजित किया गया। 23 फरवरी से शुरू हुई इस कार्यशाला में छात्रों, शोधार्थियों और शिक्षकों ने चिप बनाने के पूरे चक्र को बारीकी से समझा। इसमें थ्योरी से लेकर फिजिकल सिलिकॉन तैयार करने तक का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। विशेषज्ञों ने फ्रंट-एंड, बैक-एंड और एनालॉग डिजाइनिंग जैसे तकनीकी विषयों पर हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग दी। इस दौरान छात्रों ने सीखा कि कैसे ओपन-सोर्स टूल्स का उपयोग करके आधुनिक चिप तैयार किए जा सकते हैं। :: दिग्गज विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव :: कार्यशाला का मुख्य आकर्षण आईआईटी गुवाहाटी के डॉ. गौरव त्रिवेदी और ओपनरोड इनीशिएटिव की सुश्री इंदिरा अय्यर के कीनोट सत्र रहे। उन्होंने प्रतिभागियों को बताया कि भविष्य में चिप डिजाइनर्स की मांग वैश्विक स्तर पर बहुत अधिक होने वाली है। यह प्रशिक्षण सीधे तौर पर प्रधानमंत्री के मेक इन इंडिया विजन को तकनीकी स्तर पर सशक्त बनाता है। :: इंडस्ट्री की जरूरतों के लिए तैयार हुए युवा :: विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के आयोजनों से उद्योग और शिक्षा जगत के बीच की दूरी कम होगी। अब यहाँ से प्रशिक्षित युवा केवल डिग्री लेकर नहीं, बल्कि बाजार की जरूरतों के हिसाब से हुनरमंद होकर निकलेंगे। कॉलेज के अधिकारियों ने कहा कि ये युवा आने वाले समय में भारत को ग्लोबल सेमीकंडक्टर हब बनाने में सेनापति की भूमिका निभाएंगे। प्रकाश/02 मार्च 2026