ज़रा हटके
09-Mar-2026
...


तेहरान (ईएमएस)। 1946 में ईरान के उत्तर-पश्चिमी शहर महाबाद में कुर्दों ने अपने स्वतंत्र राज्य, महाबाद गणराज्य या कुर्दिस्तान गणराज्य की स्थापना की थी। 22 जनवरी 1946 को कुर्द नेता काजी मुहम्मद ने इस गणराज्य की घोषणा की। काजी मुहम्मद लंबे समय से कुर्दों के सांस्कृतिक और राजनीतिक अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे थे और स्वतंत्र कुर्द राज्य आंदोलन के प्रमुख चेहरे बन चुके थे। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद क्षेत्र में बदलते भू-राजनीतिक हालात ने कुर्द आंदोलन को अवसर दिया। उस समय उत्तरी ईरान में सोवियत संघ की मौजूदगी थी, जिसका समर्थन कुर्द विद्रोहियों को मिला।इस समर्थन से कुर्दों ने महाबाद और आसपास के क्षेत्रों पर नियंत्रण स्थापित किया और स्वतंत्र राष्ट्र की घोषणा कर दी। महाबाद गणराज्य में महाबाद, बुकान, पिरानशहर, उर्मिया और सलमास जैसे कुर्द बहुल क्षेत्र शामिल थे। इस छोटे राज्य ने सांस्कृतिक और सामाजिक सुधारों की शुरुआत की। कुर्द भाषा में शिक्षा को बढ़ावा मिला, साहित्यिक गतिविधियों को प्रोत्साहन मिला और महिलाओं की शिक्षा पर जोर दिया गया। गणराज्य की सैन्य शक्ति पेशमर्गा सेना थी। हालांकि, यह स्वतंत्रता लंबे समय तक कायम नहीं रह सकी। शीत युद्ध की शुरुआत के साथ अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ा और 1946 के अंत तक सोवियत सेना ईरान से लौट गई। इसके बाद ईरानी सेना ने दिसंबर 1946 में महाबाद पर कब्जा कर लिया। कुर्दिस्तान गणराज्य की सभी संस्थाएं भंग कर दी गईं, कुर्द भाषा के स्कूल बंद किए गए और साहित्यिक सामग्री नष्ट कर दी गई। काजी मुहम्मद को गिरफ्तार कर संक्षिप्त मुकदमे के बाद 31 मार्च 1947 को फांसी दी गई। हालांकि महाबाद गणराज्य केवल एक वर्ष तक अस्तित्व में रहा, यह आधुनिक इतिहास में कुर्द स्वतंत्रता आंदोलन का महत्वपूर्ण प्रतीक बना। आज भी यह घटना कुर्दों के बीच स्वतंत्र राष्ट्र की आकांक्षा का ऐतिहासिक उदाहरण मानी जाती है। यह छोटे लेकिन प्रभावशाली राज्य कुर्दों की राजनीतिक और सांस्कृतिक पहचान की याद दिलाता है। आशीष/ईएमएस 09 मार्च 2026