ज़रा हटके
09-Mar-2026
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बर्लिन(ईएमएस)। जर्मनी में पिछले तीन दशकों से संरक्षित भेड़ियों की बढ़ती आबादी अब इंसानों और पशुपालकों के लिए बड़ी मुसीबत बन गई है। इस समस्या से निपटने के लिए जर्मनी के निचले सदन (बुंडेस्टाग) ने एक ऐतिहासिक और कड़ा कानून पारित किया है, जिसके तहत अब भेड़ियों का शिकार करना कानूनी रूप से मान्य होगा। यह फैसला उन हजारों किसानों और ग्रामीणों के पक्ष में लिया गया है जो लंबे समय से इन शिकारी जानवरों के आतंक से जूझ रहे थे। चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा लाए गए इस बिल को विपक्षी दलों का भी व्यापक समर्थन मिला है, जो दर्शाता है कि अब वन्यजीव संरक्षण और ग्रामीण सुरक्षा के बीच संतुलन बनाना अनिवार्य हो गया है। आंकड़ों के अनुसार, अकेले वर्ष 2024 में भेड़ियों ने लगभग 4,300 पालतू जानवरों, जिनमें मुख्य रूप से भेड़, बकरियां और बछड़े शामिल थे, को अपना निवाला बनाया। क्रिश्चियन डेमोक्रेटिक यूनियन के नेताओं ने इस कानून की वकालत करते हुए कहा कि भेड़ियों की बढ़ती संख्या ने पारिस्थितिकी तंत्र का संतुलन बिगाड़ दिया है और बेगुनाह मवेशियों की सुरक्षा के लिए यह कदम उठाना जरूरी था। नए कानून के तहत जर्मनी के सभी 16 राज्यों को यह अधिकार दिया गया है कि वे जुलाई से अक्टूबर के बीच उन क्षेत्रों में शिकार की अनुमति दे सकें जहां भेड़ियों का घनत्व बहुत अधिक है। विशेष रूप से उन भेड़ियों को किसी भी मौसम में मारने की अनुमति होगी जिन्होंने पहले कभी पालतू जानवरों पर हमला किया है। इस नीतिगत बदलाव के पीछे एक बेहद चर्चित व्यक्तिगत घटना भी जुड़ी हुई है। साल 2022 में यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के प्रिय पालतू टट्टू डॉली को हनोवर के पास एक भेड़िये ने मार दिया था। इस हाई-प्रोफाइल घटना के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भेड़ियों के कंजर्वेशन स्टेटस की समीक्षा की मांग तेज हो गई। आखिरकार यूरोपीय संघ ने भी अपनी सुरक्षा रेटिंग में ढील दी, जिससे जर्मनी जैसे देशों के लिए शिकार को वैध बनाने का रास्ता साफ हो गया। इसे एक बड़े कूटनीतिक और नीतिगत बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है जिसने दशकों पुराने संरक्षण नियमों को बदल दिया है। हालांकि, इस कानून को लेकर जर्मनी के भीतर विरोध के स्वर भी तेज हैं। पर्यावरणवादी संगठनों और ग्रीन पार्टी ने इस बिल का कड़ा विरोध करते हुए इसे प्रतीकात्मक राजनीतिक कार्रवाई बताया है। उनका तर्क है कि भेड़ियों को मारने के बजाय बाड़ लगाने और सुरक्षा कुत्तों के इस्तेमाल जैसे उपायों पर जोर देना चाहिए। दिलचस्प बात यह है कि जर्मनी में भेड़िया अब एक बड़ा चुनावी मुद्दा भी बन चुका है। ग्रामीण इलाकों में भेड़ियों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने वाले दक्षिणपंथी दलों को भारी जनसमर्थन मिल रहा है। फिलहाल यह बिल ऊपरी सदन (बुंडेसरात) में भेजा गया है, जहाँ इस महीने के अंत में अंतिम मुहर लगने की संभावना है। वीरेंद्र/ईएमएस 09 मार्च 2026