ज़रा हटके
09-Mar-2026
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नई दिल्ली (ईएमएस)। जिस तरह से शरीर को स्वस्थ रखना ज़रूरी है, वैसे ही मन का स्वस्थ होना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। योग में मन को संतुलित और शांत रखने के लिए पांच चित्त वृत्तियों का उल्लेख किया गया है, जो मानसिक स्वास्थ्य को मजबूत करने में बेहद सहायक मानी जाती हैं। योग शास्त्र के अनुसार चित्त वृत्ति निरोध का अर्थ है मन का अध्ययन करना और उसे बोझ, तनाव और अनावश्यक विचारों से मुक्त करना। आयुष मंत्रालय के मुताबिक योग की पाँच प्रमुख चित्त वृत्तियां प्रमाणवृत्ति, विपर्ययवृत्ति, विकल्प वृत्ति, निद्रावृत्ति और स्मृतिवृत्ति मन की दशा को समझने और उसे नियंत्रित रखने की कुंजी हैं। पहली है प्रमाणवृत्ति, जिसे ध्यान का पहला चरण माना जाता है। इसमें मन को सही ज्ञान और धारणा की अवस्था में लाया जाता है, जहां इंद्रियों के माध्यम से वास्तविक अनुभव प्राप्त होता है। दूसरी है विपर्ययवृत्ति, जिसमें मन में मौजूद भ्रम दूर किए जाते हैं। मन में पल रहे विपरीत या गलत ज्ञान को बदलकर सही दिशा में ले जाना इसी का उद्देश्य है। तीसरी विकल्प वृत्ति कल्पना आधारित ज्ञान से जुड़ी है। इसमें मन ऐसी धारणाएं बनाता है जो वास्तविक वस्तु पर आधारित नहीं होतीं, बल्कि कल्पना से उत्पन्न होती हैं। चौथी है निद्रावृत्ति, जिसका अर्थ है ज्ञान के बोझ का अभाव। इस अवस्था में मन गहरी नींद या तमस की स्थिति में होता है, जहां विचारों का प्रभाव कम हो जाता है। पाँचवीं स्मृतिवृत्ति वह स्थिति है, जिसमें मन अतीत की यादों में बार-बार खो जाता है। पुरानी स्मृतियां सुख का अनुभव देती हैं, लेकिन कभी-कभी यह मानसिक बोझ भी बन सकती हैं। योग के अनुसार ये पाँचों वृत्तियां मन के विकारों को दूर करने, तनाव घटाने और मानसिक शांति लौटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इनकी समझ और अभ्यास से व्यक्ति अपनी भावनाओं पर नियंत्रण पा सकता है और जीवनशैली को बेहतर तरीके से मैनेज कर सकता है। सुदामा/ईएमएस 09 मार्च 2026