- हॉर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही प्रभावित, सप्लाई घटने से वैश्विक बाजारों में बढ़ी चिंता नई दिल्ली (ईएमएस)। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण वैश्विक तेल बाजार में भारी उथल-पुथल देखने को मिल रही है। तेल की सप्लाई और शिपिंग प्रभावित होने से कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत साढ़े तीन साल बाद पहली बार 114 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई। युद्ध के कारण सप्लाई को लेकर बढ़ती अनिश्चितता ने बाजारों में चिंता बढ़ा दी है। अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड आयल की कीमत शिकागो मर्केंटाइल एक्सचेंज में कारोबार शुरू होने के बाद 107.97 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। वहीं अमेरिकी कच्चा तेल वेस्ट टेक्सेज इंटरमीडियट (डब्ल्यूटीआई) करीब 106.22 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता देखा गया, जो शुक्रवार के बंद भाव 90.90 डॉलर की तुलना में लगभग 16.9 प्रतिशत ज्यादा है। पिछले एक सप्ताह में ही अमेरिकी कच्चे तेल की कीमत लगभग 36 प्रतिशत और ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत करीब 28 प्रतिशत बढ़ चुकी है। तेल बाजार में उछाल का मुख्य कारण पश्चिम एशिया में बढ़ता सैन्य तनाव है। खासतौर पर स्ट्रेट आफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से सप्लाई पर दबाव बढ़ गया है। यह समुद्री मार्ग दुनिया की कुल तेल सप्लाई का लगभग 20 प्रतिशत संभालता है और हर दिन करीब 1.5 करोड़ बैरल तेल इसी रास्ते से भेजा जाता है। इरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों के खतरे के कारण तेल टैंकरों की आवाजाही लगभग रुक गई है। इस रास्ते से सउदी अरबिया, कुबैत, इराक, कतर, बहरीन और यूनाइटेड अरब अमीरात जैसे देशों का तेल और गैस निर्यात होता है। निर्यात में रुकावट के कारण कुछ देशों ने उत्पादन भी कम कर दिया है क्योंकि उनके भंडारण टैंक तेजी से भर रहे हैं। ईरान प्रतिदिन लगभग 16 लाख बैरल तेल निर्यात करता है, जिसमें से अधिकांश चीन को जाता है। यदि यह सप्लाई बाधित होती है तो चीन को अन्य देशों से तेल खरीदना पड़ सकता है, जिससे वैश्विक बाजार में कीमतों पर और दबाव बढ़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तनाव लंबे समय तक बना रहा तो महंगे तेल के कारण दुनिया भर में महंगाई बढ़ सकती है और आर्थिक गतिविधियों पर भी असर पड़ सकता है। सतीश मोरे/09मार्च ---