व्यापार
09-Mar-2026


नई ‎दिल्ली (ईएमएस)। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। सोमवार को तेल की कीमतों में करीब 30 फीसदी की बढ़ोतरी देखी गई और यह 120 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई। भारत जैसे देशों के लिए जो कच्चा तेल आयात करते हैं, यह स्थिति अर्थव्यवस्था और विभिन्न उद्योगों के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकती है। तेल उत्पादक कंपनियों जैसे ओएनजीसी और ऑयल इंडिया कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से सीधे लाभान्वित होती हैं। इन कंपनियों के लिए हर 1 डॉलर की कीमत बढ़ोतरी से सालाना 300–400 करोड़ रुपये का अतिरिक्त रेवेन्यू होने का अनुमान है। हिंदुस्तान पेट्रोलियम, भारत पेट्रोलियम और इंडियन ऑयल जैसी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के लिए कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें चुनौती बन सकती हैं। सरकार फिलहाल पेट्रोल और डीजल की रिटेल कीमतें बढ़ाने के पक्ष में नहीं है, इसलिए बढ़ी हुई लागत सीधे इन कंपनियों के मार्जिन और मुनाफे पर असर डालती है। पेंट कंपनियों के लिए भी तेल की कीमतें चिंता का विषय हैं। पेंट बनाने में इस्तेमाल होने वाले कई रसायन पेट्रोकेमिकल से जुड़े होते हैं। लागत बढ़ने पर कंपनियों को उत्पाद की कीमतें बढ़ानी पड़ सकती हैं, जिससे बिक्री और मांग प्रभावित हो सकती है। ब्रोकरेज फर्मों ने एशियन पेंट्स और बर्जर पेंट्स के टारगेट कम किए हैं। एविएशन कंपनियों के लिए भी तेल की कीमतें बड़ी चुनौती हैं। इंडिगो जैसी एयरलाइंस के लिए एविएशन टरबाइन फ्यूल का खर्च बढ़ने से संचालन और मुनाफे पर दबाव बढ़ सकता है। सतीश मोरे/09मार्च ---