खरगोन (ईएमएस)। मध्य प्रदेश सरकार ने शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) उत्तीर्ण करना अनिवार्य करने का निर्णय लिया है। इसके आदेश जारी होने के बाद राज्य भर के शिक्षक खुलकर विरोध दर्ज करा रहे है। शुक्रवार को मुख्यालय पर मप्र शासकीय शिक्षक संगठन के बैनर तले इकट्ठा हुए शिक्षकों ने एसडीएम कार्यालय परिसर में नारेबाजी कर प्रदर्शन किया। इसके बाद मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सांैपा। शिक्षकों ने मांग की है कि सरकार इस आदेश को वापस लें एवं सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करे। ज्ञापन में बताया कि स्कूल शिक्षा विभाग ने निर्देश जारी किए कि आरटीई अधिनियम 2009 के लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों को सेवा में बने रहने के लिए टीईटी परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी। जिन शिक्षकों की सेवानिवृत्ति में पांच वर्ष से अधिक का समय शेष है, उन्हें टीईटी परीक्षा में शामिल होना होगा। उनके पास परीक्षा उत्तीर्ण करने के लिए दो साल की समय सीमा है। निर्धारित समय सीमा के भीतर परीक्षा उत्तीर्ण करने में विफल रहने पर सेवा से निष्कासन हो सकता है। इस फैसले से शिक्षकों में व्यापक चिंता पैदा हो गई है, उनका कहना है कि उनकी भर्ती पहले के नियमों के तहत कानूनी रूप से की गई थी और दशकों की सेवा के बाद उन्हें नए पात्रता मानदंडों के अधीन नहीं किया जाना चाहिए। शिक्षक संगठनों ने राज्य सरकार से सर्वोच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दायर करने का आग्रह किया है। 13 मार्च 2026 ईएमएस