क्षेत्रीय
13-Mar-2026
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खरगोन (ईएमएस)। निमाड़.अंचल का लोकपर्व गणगौर की धूम शनिवार को बाडिय़ों में जवारे रुपी माता की बुआई (मूठ रखने) के साथ शुरु हो जाएगी। जवारे बुआई को लेकर बाडिय़ों में तैयारियों की जा रही हैं। वहीं माता लाए जाने वाले घरों में सफाई व रंगाई-पुताई शुरू हो गई है। गौरी शिव के विवाह का यह पर्व 27 मार्च तक चलेगा। माता जवारों को बोने के लिए बाजार में बांस की छोटी-छोटी टोकरियां की बिक्री शुरू हो गई है। शहर में बड़ी संख्या में माता रथ विभिन्न समाजजन अपने घर लाते हैं। इस दौरान जहां प्रचलित लोकगीतों में रणुबाई व गणगौर पार्वती जी की आराधना की जाती हैं। चैत्रवती एकादशी के दिन सुहागिन महिलाएं बांस की टोकरियों में गेहूं रखकर माता की बाड़ी (ब्राह्मण के घर) पहुंचती हैं। शहर में लगभग एक दर्जन से अधिक स्थानों पर माता की बाड़ी है, जहां पर गेहूं के दाने टोकरियों में भरकर बोए जाते हैं। एक सप्ताह तक जवारों को बाड़ी सेवक द्वारा पवित्र जल से सींचा जाता है और पूजा-अर्चना की जाती है। गणगौर की तीज पर माता की बाड़ी खोली जाएगी। इस दौरान महिलाएं माता की पूजा-अर्चना कर ढोल-मांदल के साथ जवारे रूपी माता को रथों में शिरोधार्य कर घर लाएगी। मांगलिक कार्यों पर लगेगी रोक पंडित अरविंद डोंगरे के अनुसार 14 मार्च से मीन खरमास की शुरुआत हो गई है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब सूर्य देव मीन राशि में प्रवेश करते हैं तो उस अवधि को खरमास कहा जाता है। इसकी अवधि एक माह की होगी। इस एक महीने के दौरान विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और यज्ञोपवीत जैसे मांगलिक कार्यों को टालने की परंपरा है। हालांकि धार्मिक दृष्टि से यह समय दान.पुण्य, पूजा.पाठ और आध्यात्मिक साधना के लिए बेहद शुभ माना जाता है। ऐसे में शादी या कोई बड़ा शुभ कार्य 14 अप्रैल के बाद के मुहूर्त का इंतजार करना पड़ सकता है। खरमास के खत्म होते ही खुशियों का सीजन फिर से लौटेगा। 15 अप्रैल से 12 जुलाई के बीच कुल 29 मुहूर्त निकल रहे हैं। 13 मार्च 2026 ईएमएस