राष्ट्रीय
16-Mar-2026


* दस साल बाद आया अहम निर्णय, सजा पर अंतिम फैसला 17 मार्च को; 2016 की घटना से देशभर में भड़का था आक्रोश अहमदाबाद (ईएमएस)| गिर सोमनाथ जिले के ऊना में वर्ष 2016 में हुए चर्चित दलित अत्याचार मामले में 16 मार्च 2026 को सत्र न्यायालय ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। लगभग एक दशक तक चली लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद अदालत ने इस मामले में 5 आरोपियों को दोषी करार दिया है, जबकि सबूतों के अभाव में 38 अन्य आरोपियों को बरी कर दिया गया है। अदालत अब दोषी ठहराए गए आरोपियों को कितनी सजा दी जाएगी, इसका अंतिम फैसला 17 मार्च को सुनाएगी। जिला सरकारी वकील केतनसिंह वाला ने फैसले की जानकारी देते हुए बताया कि मामले की शुरुआत में दर्ज एफआईआर में बड़ी संख्या में आरोपियों के नाम शामिल थे। हालांकि, लंबे समय तक चली सुनवाई, गवाहों के बयान और पेश किए गए सबूतों के आधार पर अदालत ने पांच आरोपियों की संलिप्तता साबित मानते हुए उन्हें दोषी ठहराया। जिन पांच आरोपियों को दोषी ठहराया गया है उनमें रमेश जादव, राकेश जोशी, प्रमोद गुस्वामी, नागजी डाया और बलवंत गुस्वामी के नाम शामिल हैं। सजा के मुद्दे पर बचाव पक्ष और सरकारी पक्ष के वकील 17 मार्च को अंतिम दलीलें पेश करेंगे, जिसके बाद अदालत सजा का ऐलान करेगी। दरअसल, यह मामला 11 जुलाई 2016 को मोटा सामढियाला गांव में सामने आया था। कथित गौ-रक्षकों के एक समूह ने गौहत्या का आरोप लगाकर एक दलित परिवार के युवकों पर हमला कर दिया था। चार युवकों को लाठियों और लोहे की पाइप से बेरहमी से पीटा गया था और बाद में उन्हें अर्धनग्न अवस्था में वाहन के पीछे बांधकर पूरे शहर में घुमाया गया था। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही देशभर में आक्रोश फैल गया था। गुजरात सहित कई राज्यों में विरोध प्रदर्शन हुए और दलित समाज में भारी नाराजगी देखी गई। दलित नेता जिग्नेश मेवाणी के नेतृत्व में अहमदाबाद से ऊना तक ‘दलित अस्मिता यात्रा’ निकाली गई थी, जिसमें हजारों लोग शामिल हुए थे। 15 अगस्त 2016 को उना में आयोजित एक विशाल सभा में दलित समाज ने पारंपरिक रूप से किए जाने वाले सफाई और मृत पशुओं के निस्तारण जैसे कामों को छोड़ने की प्रतिज्ञा भी ली थी। इस मामले की जांच सीआईडी क्राइम को सौंपी गई थी। जांच के दौरान कुल 43 लोगों को गिरफ्तार किया गया था, जिनमें कुछ पुलिस अधिकारी भी शामिल थे। दिसंबर 2016 में हत्या के प्रयास, अपहरण, लूट और एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत चार्जशीट दाखिल की गई थी। अगस्त 2018 से इस मामले की ट्रायल प्रक्रिया शुरू हुई और कई वर्षों तक सुनवाई चलती रही। घटना के बाद देशभर के कई राजनीतिक नेता और सामाजिक कार्यकर्ता पीड़ित परिवारों से मिलने पहुंचे थे। करीब दस साल बाद आए इस फैसले के साथ यह संवेदनशील मामला अब न्यायिक प्रक्रिया के अंतिम चरण में पहुंच गया है। अब सभी की नजरें 17 मार्च को होने वाली सजा की घोषणा पर टिकी हुई हैं। सतीश/16 मार्च