तेहरान,(ईएमएस)। मिडिल ईस्ट में चल रहे ईरान और इजरायल के युद्ध के बीच ऐसी आहट, एक ऐसी सैन्य हलचल सामने आई है जिसने पूरी दुनिया के रक्षा विशेषज्ञों को हैरान किया है। अमेरिकी नौसेना के सबसे आधुनिक माइंड काउंटर मेजर जहाजों में से दो यूएसएस तुलसा और यूएसएस सा बरबरा अचानक अपने बेस बहरीन से 3500 मील दूर मलेशिया के पेनांग में दिखाई दिए हैं। यह घटनाक्रम तब सामने आया है जब हुर्म जलडमरू मध्य में समुद्री बारूदी सुरंगों का खतरा चरम पर है। इन जहाजों का प्राथमिक काम ही समुद्र से बारूदी सुरंगों को खोजकर नष्ट करना है, ताकि तेल के टैंकरों और मालवाहक जहाज सुरक्षित निकल सके। इसके बाद इनका युद्ध क्षेत्र से इतनी दूर जाना अमेरिका की सैन्य रणनीति और सुरक्षा चिंताओं पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है। बताया जा रहा हैं कि अमेरिका ने इन कीमती जहाजों को ईरान की जवाबी कार्रवाही से बचने के लिए जानबूझकर एक क्षेत्र से बाहर निकाला है। विशेषज्ञों का तर्क है कि इंडिपेंडेंस क्लास के यह जहाज एलुमिनियम से बने हैं। हालांकि ये तकनीक में बेजोड़ हैं, लेकिन संरचनात्मक रूप से यह पुराने लकड़ी के माइन वेपर्स की तुलना में अधिक नाजुक हैं। अगर ईरान अपनी एंटीशिप मिसाइलों या विस्फोटक नावों से इन पर हमला करता है, तब इनके डूबने या भारी नुकसान पहुंचने का खतरा बहुत ज्यादा है। अमेरिका संभवत अपने इन महंगे युद्धपोतों को सॉफ्ट टारगेट बनने से बचाना चाहता है। यूएसएस टुलसा और यूएसएस सा बरवरा को मलेशिया के नॉर्थ बटरवर्थ कंटेनर टर्मिनल पर खड़ा देखा जाना यह संकेत है कि अमेरिका फिलहाल मिडिल ईस्ट के समुद्री रास्तों की सुरक्षा को लेकर बैकफुट पर है। हुरमुस की खारी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति की जीवन रेखा है। यहां से वैश्विक तेल का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है। हालांकि अमेरिकी नौसेना ने बताया है लेकिन 3500 मील की यह दूरी महज रसद आपूर्ति के तर्क से मेल नहीं खाती। एक अन्य पहलू यह भी है कि अमेरिका अपनी सैन्य शक्ति का केंद्र धीरे-धीरे मिडिल ईस्ट से हटाकर इंडोपेसिफिक की ओर कर रहा है। चीन के बढ़ते प्रभाव को देखकर इन जहाजों की मलेशिया में मौजूदगी को एक नए सैन्य तालमेल के रूप में देखा जा रहा है। वर्तमान में मिडिल ईस्ट में केवल एक माइन हंटर जहाज यूएस कैनबरा तैनात बताया जा रहा है। इस घटना ने सहयोगी देशों, विशेष तौर पर खाड़ी देशों और इजराइल के बीच भी चिंता पैदा कर दी है जो समुद्र में अमेरिकी सुरक्षा कवच पर निर्भर है। आने वाले दिनों में यह देखना होगा कि क्या अमेरिका इन जहाजों को वापस मिडिल ईस्ट भेजता है या जापान में तैनात अपने अन्य माइनपर्स को इस कमी को पूरा करने के लिए बुलाता है। फिलहाल मलेशिया के तट पर खड़े यह जहाज वाशिंगटन की डिफेंसिव मोड़ यानी रक्षात्मक मुद्रा की गवाही दे रहे हैं। आशीष दुबे / 18 मार्च 2026