अंतर्राष्ट्रीय
18-Mar-2026


इस्लामाबाद,(ईएमएस)। रूस और पाकिस्तान के बीच ऊर्जा सहयोग को लेकर नई चर्चा सामने आई है। रूस ने पाकिस्तान को रियायती दरों पर कच्चा तेल देने का प्रस्ताव दिया है, लेकिन इसके साथ एक अहम शर्त भी रखी है। यह प्रस्ताव तब समय आया है जब पाकिस्तान गंभीर आर्थिक और ऊर्जा संकट से जूझ रहा है। दरअसल, मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और ईरान से जुड़े हालातों के कारण वैश्विक तेल सप्लाई प्रभावित हुई है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें बढ़ गई हैं, जिसका सीधा असर पाकिस्तान जैसे आयात-निर्भर देशों पर पड़ा है। पाकिस्तान पहले से ही महंगाई और विदेशी मुद्रा संकट से जूझ रहा है, और अब पेट्रोल-डीजल की कीमतों में करीब 20 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी ने आम जनता की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। इस बीच इस्लामाबाद में रूस के राजदूत अल्बर्ट खुरेव ने कहा कि रूस पाकिस्तान को सस्ता तेल देने के लिए तैयार है। लेकिन उन्होंने साफ किया कि इसके लिए पाकिस्तान को खुद पहल करनी होगी और औपचारिक तौर पर संपर्क करना होगा। यानी यह ऑफर एकतरफा नहीं है, अब गेंद पूरी तरह पाकिस्तान के पाले में है। रूस पहले से ही वैश्विक बाजार में अपना तेल बेचकर मुनाफा कमा रहा है, खासकर तब जब अमेरिका ने कुछ प्रतिबंधों में अस्थायी छूट दे दी है। इसके बाद भारत जैसे देश भी रूस से बड़े पैमाने पर तेल खरीद रहे हैं। पाकिस्तान के लिए भी विकल्प बन सकता है, क्योंकि वह अब तक मुख्य रूप से खाड़ी देशों पर निर्भर रहा है। हालांकि, पाकिस्तान के लिए यह फैसला आसान नहीं है। इसके लिए अमेरिकी दबाव और संभावित आर्थिक प्रतिबंधों का भी डर है। यही वजह है कि पहले भी उसने रूस से सीमित मात्रा में तेल खरीदने के बाद इस तेल सप्लाई को रोक दिया था। फिलहाल पाकिस्तान रूस से तेल के भुगतान के लिए चीनी मुद्रा युआन का इस्तेमाल कर रहा है। पूर्व राजनयिक अब्दुल बासित का मानना है कि पाकिस्तान को अपने ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने के लिए रूस पर भरोसा करना चाहिए। कुल मिलाकर, रूस का यह प्रस्ताव पाकिस्तान के लिए राहत का मौका हो सकता है, लेकिन इसके लिए उसे कूटनीतिक और आर्थिक संतुलन साधना होगा। आशीष दुबे / 18 मार्च 2026