वाशिंगटन,(ईएमएस)। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयान ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है। उन्होंने संकेत दिया है कि वे क्यूबा को “किसी न किसी रूप में अपने नियंत्रण में लेने” का इरादा रखते हैं। ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बता कर ट्रंप ने कहा कि वे क्यूबा को या आज़ाद करूंगा या “अपने कब्जे में लूंगा”, जो अमेरिका की अब तक की क्यूबा नीति से काफी अलग और आक्रामक बयान माना जा रहा है। अमेरिका और क्यूबा के संबंध बीते 65 वर्षों से तनावपूर्ण रहे हैं, लेकिन किसी भी अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस तरह खुलकर क्यूबा पर कब्जे की बात नहीं कही थी। इस बयान को हल्के में नहीं लिया जा रहा, क्योंकि ट्रम्प पहले ही वेनेजुएला और ईरान में सैन्य कार्रवाई कर चुके हैं। ऐसे में क्यूबा को लेकर उनकी टिप्पणी को संभावित अगली रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। अमेरिका ने क्यूबा पर आर्थिक दबाव भी बढ़ा दिया है। जनवरी से क्यूबा को मिलने वाली तेल सप्लाई लगभग रोक दी गई है और अन्य देशों को भी चेतावनी दी गई है कि वे क्यूबा को तेल न दें। हाल ही में अमेरिकी कोस्ट गार्ड ने कोलंबिया से क्यूबा जा रहे एक तेल टैंकर को रोक लिया। इसके चलते क्यूबा में गंभीर संकट पैदा हो गया है—पेट्रोल की कीमतें ब्लैक मार्केट में बहुत बढ़ गई हैं, बिजली कटौती आम हो गई है, अस्पतालों में सर्जरी टल रही हैं और खाने-पीने की कमी बढ़ रही है। इन हालात के बीच क्यूबा के राष्ट्रपति मिगेल डियाज-कैनेल ने स्वीकार किया है कि अमेरिका के साथ बातचीत चल रही है और जल्द ही अर्थव्यवस्था खोलने के कदम उठाए जा सकते हैं। खबरें हैं कि अमेरिका चाहता है कि डियाज-कैनेल पद छोड़ें, हालांकि सीधे तौर पर सत्ता परिवर्तन की बात नहीं की जा रही। यह रणनीति पहले वेनेजुएला में अपनाई गई नीति जैसी मानी जा रही है। दूसरी ओर, रूस ने संकेत दिया है कि जरूरत पड़ने पर वह क्यूबा का समर्थन कर सकता है। दोनों देशों के बीच संपर्क लगातार बना हुआ है। क्यूबा में आर्थिक सुधारों के संकेत भी मिल रहे हैं, जैसे विदेशों में रहने वाले क्यूबाई लोगों को निवेश और कारोबार की अनुमति देना। हालांकि, ऊर्जा संकट इतना गहरा है कि कई घोषणाएं रेडियो के जरिए करनी पड़ रही हैं क्योंकि बिजली उपलब्ध नहीं है। कुल मिलाकर, यह स्थिति वैश्विक राजनीति में एक नए टकराव की संभावना को दर्शाती है, जहां क्यूबा अगला बड़ा केंद्र बन सकता है। आशीष दुबे / 18 मार्च 2026