-दोहरी सदस्यता को लेकर चर्चा तेज, 14 दिन के नियम पर उठे सवाल नई दिल्ली,(ईएमएस)। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन 10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेंगे। इसी दिन शिवेश राम, रामनाथ ठाकुर और उपेंद्र कुशवाहा भी उच्च सदन की सदस्यता ग्रहण करेंगे। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इस बीच, राज्यसभा चुनाव के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या नीतीश कुमार और नितिन नवीन को 30 मार्च तक बिहार विधानमंडल की सदस्यता से इस्तीफा देना होगा। कुछ नेताओं द्वारा 14 दिनों की समयसीमा का हवाला देते हुए यह दावा किया जा रहा है कि निर्धारित अवधि में इस्तीफा न देने पर उनकी राज्यसभा सदस्यता खतरे में पड़ सकती है। हालांकि, संवैधानिक प्रावधानों की पड़ताल करने पर स्थिति स्पष्ट होती है कि दोनों नेताओं को 30 मार्च तक इस्तीफा देने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता है। दरअसल, भारतीय संविधान का अनुच्छेद 101(2) के अनुसार कोई भी व्यक्ति एक साथ संसद और राज्य विधानमंडल दोनों का सदस्य नहीं रह सकता, लेकिन इसके लिए त्यागपत्र देने की समयसीमा नियमों के तहत निर्धारित होती है। यह समयसीमा प्रोहिबिशन ऑफ सिमल्टेनियस मेंबरशिप रूल्स 1950 के तहत तय की गई है, जिसमें 14 दिनों का प्रावधान है। यह अवधि उस समय से लागू होती है जब कोई व्यक्ति दोनों सदनों का सदस्य निर्वाचित हो जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, शपथ ग्रहण और औपचारिक सदस्यता की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही इस नियम की समयसीमा प्रभावी होती है। ऐसे में फिलहाल इस्तीफे को लेकर उठ रही अटकलें पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं। बहरहाल राजनीतिक गलियारे में इस मुद्दे पर चर्चा जारी है। हिदायत/ईएमएस 28मार्च26