राष्ट्रीय
30-Mar-2026
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रेल भवन में गति शक्ति विश्वविद्यालय व नागरिक उड्डयन क्षेत्र के बीच ऐतिहासिक समझौता; शिक्षा, तकनीक और नीति के त्रिवेणी संगम से परिवहन क्षेत्र को नई गति और नई दिशा नई दिल्ली (ईएमएस)। नई दिल्ली स्थित रेल भवन में आज वह क्षण साकार हुआ,जिसे केवल एक औपचारिक समझौते के रूप में नहीं, बल्कि भारत के बुनियादी ढांचे और समेकित परिवहन दृष्टि के सशक्त विस्तार के रूप में देखा जाना चाहिए।गति शक्ति विश्वविद्यालय,नागरिक उड्डयन महानिदेशालय और केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय के बीच स्थापित यह साझेदारी उस व्यापक राष्ट्रीय सोच का प्रतीक है,जिसमें विकास को अलग-अलग खंडों में नहीं, बल्कि समग्रता में देखने की दृष्टि पर बल दिया जा रहा है।कार्यक्रम में उपस्थित केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अपने उद्गार व्यक्त करते हुए स्पष्ट किया कि भारत अब पारंपरिक ढांचे से आगे बढ़कर एकीकृत इंफ्रास्ट्रक्चर के युग में प्रवेश कर चुका है।उन्होंने कहा कि रेलवे, विमानन और अन्य परिवहन माध्यमों के बीच बेहतर समन्वय ही भविष्य की गति को निर्धारित करेगा। उनके शब्दों में,“जब विभिन्न क्षेत्रों का ज्ञान और तकनीकी दक्षता एक मंच पर आती है,तब विकास की रफ्तार कई गुना बढ़ जाती है।” उन्होंने गति शक्ति विश्वविद्यालय को इस परिवर्तन का बौद्धिक केंद्र बताते हुए कहा कि यह संस्थान देश के युवाओं को न केवल नई दिशा देगा,बल्कि उन्हें वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुरूप तैयार भी करेगा।उन्होंने विश्वविद्यालय में मैन्युफैक्चरिंग टेक्नोलॉजी पर आधारित ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ स्थापित करने का सुझाव देते हुए कहा कि इससे हर वर्ष लगभग 1000 छात्रों को उच्च स्तरीय तकनीकी प्रशिक्षण का लाभ मिल सकेगा और इसके लिए आवश्यक वित्तीय सहयोग भी सुनिश्चित किया जाएगा।इसी क्रम में नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने अपने विचार रखते हुए कहा कि भारत का विमानन क्षेत्र देश के सबसे तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्रों में से एक है,जिसकी वार्षिक वृद्धि दर 10 से 12 प्रतिशत के बीच है और यह प्रवृत्ति आने वाले वर्षों में भी जारी रहने की संभावना है।उन्होंने कहा कि हवाई अड्डों की बढ़ती संख्या,यात्रियों की लगातार वृद्धि और राष्ट्रीय विमान बेड़े के विस्तार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अब वैश्विक मानकों के अनुरूप प्रशिक्षित कार्यबल तैयार करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।उन्होंने यह भी कहा कि हाल ही में विकसित हो रहे जेवर एयरपोर्ट जैसे प्रकल्प इस बात के प्रतीक हैं कि भारत किस गति और व्यापक दृष्टि के साथ मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी को आगे बढ़ा रहा है।इस समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर फ़ैज़ अहमद किदवई और प्रो. मनोज चौधरी द्वारा किए गए, जो इस साझेदारी के प्रशासनिक और शैक्षणिक दोनों आयामों को स्पष्ट रूप से रेखांकित करता है।इस अवसर पर रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष सतीश कुमार तथा नागरिक उड्डयन सचिव समीर कुमार सिन्हा सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि यह पहल केवल दो संस्थानों के बीच का समझौता नहीं, बल्कि बहु-स्तरीय समन्वय और राष्ट्रीय प्राथमिकता का परिणाम है। यह साझेदारी विशेष रूप से भारत के तेजी से विकसित हो रहे मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल (MRO) क्षेत्र को सुदृढ़ करने पर केंद्रित है। लंबे समय से यह क्षेत्र विदेशी निर्भरता के कारण चुनौतियों का सामना करता रहा है, लेकिन अब इस समझौते के माध्यम से न केवल मानव संसाधन को सशक्त बनाया जाएगा, बल्कि एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियरिंग (AME) शिक्षा को भी एक नई दिशा दी जाएगी। इसके तहत तीन वर्षीय बी.एससी. (एएमई) पाठ्यक्रम विकसित किया जाएगा,जिसमें अकादमिक उत्कृष्टता, नियामकीय मानकों और उद्योग की, आवश्यकताओं का समन्वय होगा।यह पाठ्यक्रम केवल सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित नहीं रहेगा,बल्कि इसमें व्यावहारिक प्रशिक्षण,सिमुलेशन आधारित शिक्षा,उद्योग के साथ साझेदारी और अप्रेंटिसशिप जैसे तत्वों को भी शामिल किया जाएगा, ताकि छात्र सीधे रोजगार के लिए तैयार हो सकें। यह पहल न केवल युवाओं के लिए नए अवसर सृजित करेगी, बल्कि विमानन क्षेत्र को आवश्यक दक्ष और प्रशिक्षित कार्यबल भी उपलब्ध कराएगी।कार्यक्रम का प्रारंभिक चरण शैक्षणिक वर्ष 2026-27 में चुनिंदा प्रमुख संस्थानों, जैसे जीएमआर स्कूल ऑफ एविएशन और एयर इंडिया एएमई अकादमी में शुरू किया जाएगा।यह पायलट चरण आगे चलकर देशव्यापी विस्तार का आधार बनेगा और शिक्षा तथा नियामकीय उत्कृष्टता का एक मानक स्थापित करेगा।गतिशक्ति विश्वविद्यालय, जो पहले ही वैश्विक और राष्ट्रीय संस्थानों जैसे एयरबस, सफरान और अन्य प्रमुख संगठनों के साथ सहयोग स्थापित कर चुका है,अब इस समझौते के माध्यम से अपने शैक्षणिक और अनुसंधान ढांचे को और अधिक सुदृढ़ करेगा।साथ ही, विश्वविद्यालय DGCA के साथ सतत विमानन ईंधन (SAF) और अन्य उभरते क्षेत्रों में अनुसंधान सहयोग भी करेगा,जिससे भारत की तकनीकी क्षमता को नई दिशा मिलेगी।यह साझेदारी नियामक संस्थानों, शैक्षणिक जगत और उद्योग के बीच एक सशक्त सेतु स्थापित करती है। जहां DGCA लाइसेंसिंग और नियामकीय मानकों को निर्धारित करेगा,वहीं गति शक्ति विश्वविद्यालय पाठ्यक्रम विकास, अनुसंधान और प्रशिक्षण के क्षेत्र में नेतृत्व करेगा।यह मॉडल न केवल वर्तमान आवश्यकताओं को पूरा करेगा, बल्कि भविष्य की चुनौतियों के लिए भी एक सुदृढ़ आधार तैयार करेगा।यदि इस पूरे घटनाक्रम को व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखा जाए,तो यह पहल पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान की मूल भावना का सशक्त विस्तार प्रतीत होती है, जिसका उद्देश्य विभिन्न मंत्रालयों और क्षेत्रों के बीच समन्वय स्थापित कर विकास को गति देना है। आज का यह आयोजन इस तथ्य को पुनः स्थापित करता है कि भारत अब केवल योजनाओं के निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए भी उतना ही गंभीर और प्रतिबद्ध है।शिक्षा,तकनीक और प्रशासन के इस त्रिवेणी संगम से न केवल वर्तमान चुनौतियों का समाधान संभव होगा,बल्कि आने वाले समय के लिए एक सुदृढ़ ,आत्मनिर्भर और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के योग्य भारत का निर्माण भी सुनिश्चित होगा। अंततः रेल भवन में संपन्न यह समझौता उस नए भारत की स्पष्ट झलक प्रस्तुत करता है,जो समन्वय, नवाचार और गति के माध्यम से अपने विकास को नई ऊँचाइयों तक ले जाने के लिए संकल्पित है।यह केवल एक दस्तावेज़ नहीं, बल्कि उस विश्वास का सशक्त प्रतीक है कि जब नीतियां,संस्थान और युवा शक्ति एक साथ आगे बढ़ते हैं, तो परिवर्तन केवल संभावना नहीं, बल्कि निश्चित उपलब्धि बन जाता है। विनोद सिंह/ईएमएस/31/03/2026