राष्ट्रीय
17-Apr-2026
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नई दिल्ली (ईएमएस)। भारतीयों के खानपान में पारंपरिक रूप से गेहूं की रोटी सबसे ज्यादा प्रचलित है, लेकिन बदलती जीवनशैली और बढ़ती स्वास्थ्य जागरूकता के चलते अब लोग मक्का, रागी, जौ और मल्टीग्रेन आटे से बनी रोटियों को भी अपनाने लगे हैं। भारतीय किचन में रोटी का स्थान बेहद अहम माना जाता है और अधिकांश लोग इसे अपने दैनिक भोजन का अनिवार्य हिस्सा बनाते हैं। ऐसे में यह समझना जरूरी हो जाता है कि अलग-अलग प्रकार की रोटियां पाचन तंत्र पर किस तरह असर डालती हैं और उन्हें पचने में कितना समय लगता है। गेहूं की रोटी सबसे सामान्य विकल्प है और लगभग हर घर में इसका सेवन किया जाता है। इसमें ग्लूटेन मौजूद होता है, जो कुछ लोगों के लिए पाचन संबंधी समस्याएं पैदा कर सकता है। आमतौर पर गेहूं की रोटी को पचने में करीब 2.5 से 3 घंटे का समय लगता है। हालांकि इसमें फाइबर भी पाया जाता है, लेकिन जिन लोगों का पाचन तंत्र कमजोर होता है, उन्हें इसे खाने के बाद पेट में भारीपन या असहजता महसूस हो सकती है। दूसरी ओर, रागी की रोटी को पोषण के लिहाज से काफी फायदेमंद माना जाता है। इसमें कैल्शियम और फाइबर प्रचुर मात्रा में होता है, जिससे यह लंबे समय तक पेट भरा रखने में सहायक होती है। यही कारण है कि इसे वजन नियंत्रण के लिए भी उपयोगी माना जाता है। हालांकि, इसकी उच्च फाइबर मात्रा के कारण यह जल्दी नहीं पचती और इसे पचने में लगभग 3 से 4 घंटे का समय लग सकता है। मल्टीग्रेन रोटी, जिसमें जौ, बाजरा और गेहूं जैसे कई अनाज शामिल होते हैं, संतुलित पोषण का अच्छा स्रोत मानी जाती है। इसका पाचन इस बात पर निर्भर करता है कि इसमें किन अनाजों का कितना अनुपात है। अधिक फाइबर होने के कारण यह धीरे-धीरे पचती है और औसतन 3 से 4 घंटे का समय लेती है। मक्का की रोटी, जो विशेष रूप से सर्दियों में लोकप्रिय होती है, ग्लूटेन-फ्री होती है, लेकिन इसे पचाना अपेक्षाकृत कठिन माना जाता है। खासकर जिन लोगों का पाचन तंत्र कमजोर होता है, उन्हें इसे पचाने में अधिक समय लग सकता है। आमतौर पर मक्का की रोटी को भी पचने में 3 से 4 घंटे का समय लगता है। विशेषज्ञों का मानना है कि पाचन की दृष्टि से गेहूं की रोटी अपेक्षाकृत जल्दी पचती है, लेकिन जिन लोगों को ग्लूटेन से परेशानी होती है, उनके लिए मल्टीग्रेन या मिश्रित आटे की रोटी बेहतर विकल्प हो सकती है। सुदामा/ईएमएस 17 अप्रैल 2026