:: युवाओं को नशे से बचाने के लिए मल्टी-प्रोंग रणनीति; ड्रग माफिया और केमिकल कंपाउंड्स पर होगी पैनी नजर :: इंदौर (ईएमएस)। शहर में नशे के बढ़ते जाल को तोड़ने और युवाओं को सुरक्षित रखने के लिए जिला प्रशासन अब बेहद सख्त रुख अपना रहा है। कलेक्टर शिवम वर्मा की अध्यक्षता में आयोजित एनसीओआरडी की जिला स्तरीय बैठक में निर्णय लिया गया कि अब इंदौर के सभी कॉलेजों में नशा मुक्ति समितियां गठित की जाएंगी। ये समितियां कैंपस में नशे के खिलाफ एक सुरक्षा कवच की तरह कार्य करेंगी। कलेक्टर ने स्पष्ट निर्देश दिए कि जिले के सभी कॉलेजों में ऐसी समितियां अनिवार्य रूप से बनाई जाएं। इन समितियों में विद्यार्थियों के साथ ही फैकल्टी को भी शामिल किया जाएगा। इनका मुख्य काम कैंपस के भीतर नशे की गतिविधियों पर नजर रखना और प्रभावित छात्रों को मुख्यधारा से जोड़कर नशा छोड़ने के लिए प्रेरित करना होगा। यदि कोई बाहरी व्यक्ति कॉलेज परिसर में ड्रग्स की बिक्री करने का प्रयास करता है, तो ये समितियां तत्काल प्रशासन को सूचना देंगी ताकि सख्त कार्रवाई की जा सके। जो शिक्षण संस्थान पहले से ही समितियों का गठन कर चुके हैं, उन्हें अधिक सक्रिय और परिणाममूलक बनाने के लिए विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। बैठक में ड्रग माफिया पर नकेल कसने के लिए नशीले केमिकल कंपाउंड्स की निगरानी पर विशेष चर्चा हुई। कलेक्टर ने कहा कि जिन रसायनों का उपयोग ड्रग्स बनाने में किया जा सकता है, उन्हें एनडीपीएस एक्ट के दायरे में लाकर कड़ी निगरानी में रखा जाएगा। इसके लिए कानूनी प्रावधानों को और अधिक सुदृढ़ करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। :: पुनर्वास केंद्रों पर विशेष ध्यान :: कलेक्टर ने निर्देश दिए कि नशा मुक्ति केंद्रों (पुनर्वास) से बाहर आ चुके बच्चों की स्थिति की नियमित समीक्षा की जाए। उनसे उनकी समस्याओं के बारे में फीडबैक लिया जाएगा ताकि उन्हें समाज में फिर से स्थापित होने में हर संभव मदद दी जा सके। साथ ही, नशा मुक्ति अभियान को केवल सरकारी कवायद न रखते हुए इसे एक जन आंदोलन का रूप दिया जाएगा, जिसमें एनजीओ और सामाजिक कार्यकर्ताओं की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। इस बैठक में अपर कलेक्टर रोशन राय, डीसीपी क्राइम राजेश त्रिपाठी और आबकारी सहायक आयुक्त अभिषेक तिवारी सहित अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित थे। प्रकाश/28 अप्रैल 2026