राष्ट्रीय
05-May-2026
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नई दिल्ली (ईएमएस)। आयुर्वेद में शहद को अमृत माना जाता है, जो अनेक गुणों से भरपूर है, लेकिन उसकी तासीर गर्म और नमी देने वाली होती है। गर्मियों में पहले ही वायुमंडल में ताप और नमी होती है। ऐसे में क्या गर्मियों में शहद का सेवन करना सही रहेगा? आयुर्वेद मानता है कि भले ही शहद की तासीर गर्म होती है, लेकिन उसे योगवाही द्रव्य भी कहा गया है। इसका अर्थ है कि शहद को जिस वस्तु के साथ मिलाकर लिया जाए, वह वैसे ही गुण आत्मसात कर लेता है। यह शहद की एक अद्भुत विशेषता है। अगर शहद का सेवन सीधे तौर पर, बिना किसी अन्य चीज के साथ या गर्म पानी में मिलाकर किया जाए, तो यह शरीर का पित्त बढ़ाकर गर्मी और जलन पैदा कर सकता है। लेकिन अगर इसे सही विधि और खाद्य पदार्थ के साथ लिया जाए, तो इसकी तासीर बदल जाती है और यह गर्मियों में भी अत्यंत लाभदायक हो सकता है। उदाहरण के लिए, गर्मियों में शहद का सेवन मिट्टी के घड़े के ठंडे पानी के साथ मिलाकर सुबह कर सकते हैं। इसमें थोड़ा नींबू का रस मिलाकर सुबह खाली पेट लेने से यह शरीर को ठंडा रखने में मदद करेगा और वजन को भी नियंत्रित रखेगा। यह मिश्रण गर्मी में शरीर को हाइड्रेटेड रखता है और स्फूर्ति प्रदान करता है। गर्मियों में सत्तू का सेवन हर घर में किया जाता है, क्योंकि यह शरीर को ठंडक और ऊर्जा देता है। कुछ लोग मीठा सत्तू लेना पसंद करते हैं और उसमें चीनी का प्रयोग करते हैं, लेकिन चीनी की बजाय सत्तू में शहद का प्रयोग किया जा सकता है। यह मिश्रण शरीर को ठंडक और ऊर्जा दोनों प्रदान करेगा। यह न केवल शरीर को हाइड्रेटेड रखेगा, बल्कि मांसपेशियों की थकान को भी पल भर में दूर कर देगा। शहद को दोपहर के वक्त दही के साथ भी लिया जा सकता है। शहद और दही का मिश्रण एक बेहतरीन प्रोबायोटिक खाद्य पदार्थ है, जो पाचन तंत्र को मजबूत करता है और लू से बचाने में भी मदद करता है। हालांकि, एक महत्वपूर्ण बात का ध्यान रखना बेहद जरूरी है कि शहद को कभी भी घी के साथ न लें। यह विरुद्ध आहार की श्रेणी में आता है, यानी ऐसे खाद्य पदार्थ जिनका एक साथ सेवन हानिकारक हो सकता है। दोनों का साथ में सेवन करने से शरीर में अधिक गर्मी बनने लगती है और वात और पित्त का असंतुलन भी हो सकता है। अतः, सही तरीके से प्रयोग करने पर शहद गर्मियों में भी स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है। मालूम हो कि गर्मियों के मौसम में आमतौर पर गर्म तासीर वाली चीजों के सेवन को कम करने की सलाह दी जाती है। ऐसा इसलिए, क्योंकि बाहरी वातावरण पहले से ही गर्म होता है और शरीर के अंदर भी पित्त बढ़ने लगता है। ऐसे में शरीर बाहरी और आंतरिक गर्मी से प्रभावित होता है। यही कारण है कि गर्मियों में ठंडी तासीर वाली चीजों की मांग बढ़ जाती है और गर्म तासीर वाली चीजों को किनारे कर दिया जाता है। सुदामा/ईएमएस 05 मई 2026