नई दिल्ली (ईएमएस)। देश में आर्थिक अपराध, बैंक धोखाधड़ी, निवेश ठगी और अवैध धन के नेटवर्क पर शिकंजा कसने में प्रवर्तन निदेशालय ने वित्तीय वर्ष दो हजार पच्चीस–छब्बीस में नया रिकॉर्ड कायम किया है। ताजा आंकड़ों के अनुसार एजेंसी ने इस अवधि में धन शोधन से जुड़े कुल एक हजार अस्सी नए मामले दर्ज किए, जो पिछले दस वर्षों के औसत की तुलना में लगभग पांच गुना अधिक बताए जा रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक पहले हर वर्ष औसतन दो सौ से ढाई सौ मामले सामने आते थे, लेकिन अब यह संख्या एक हजार के पार पहुंच गई है। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि आर्थिक अपराधों की निगरानी और जांच की रफ्तार पहले से कहीं अधिक तेज हुई है। सबसे चौंकाने वाली बात संपत्ति कुर्की के मामलों में देखने को मिली। प्रवर्तन निदेशालय ने एक वर्ष के भीतर सात सौ बारह अस्थायी कुर्की आदेश जारी करते हुए इक्यासी हजार चार सौ बाईस करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियां जब्त कीं। यह पिछले वर्ष की तुलना में एक सौ इकहत्तर प्रतिशत अधिक है और अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा माना जा रहा है। एजेंसी ने इस अवधि में छह सौ सत्तावन अभियोग पत्र भी न्यायालय में प्रस्तुत किए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अब जांच एजेंसियां केवल छापेमारी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि डिजिटल लेनदेन की निगरानी, वित्तीय कड़ियों की पड़ताल और तकनीकी विश्लेषण के जरिए अपराधियों तक तेजी से पहुंच बनाई जा रही है। सुबोध/०५-०५-२०२६