राष्ट्रीय
05-May-2026


नई दिल्ली (ईएमएस)। देश में बढ़ती महंगाई, ऊर्जा कीमतों में उतार–चढ़ाव और मौसम संबंधी चुनौतियों के बीच राज्यों द्वारा दी जा रही नकद सहायता आम परिवारों के लिए बड़ा सहारा बनकर उभर रही है। एक प्रमुख वित्तीय अध्ययन संस्था क्रिसिल की ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्यों की प्रत्यक्ष नकद सहायता और केंद्र सरकार की जनकल्याण योजनाएं मिलकर चालू वित्तीय वर्ष में घरेलू खर्च को संतुलित रखने में अहम भूमिका निभा सकती हैं। रिपोर्ट के अनुसार देश के अट्ठाईस राज्यों में से सत्रह राज्य और एक केंद्र शासित प्रदेश इस वर्ष मासिक नकद सहायता दे रहे हैं। वर्ष दो हजार उन्नीस में यह संख्या केवल चार थी, जिससे साफ है कि बीते वर्षों में इस तरह की योजनाओं का दायरा तेजी से बढ़ा है। रिपोर्ट में बताया गया है कि कम आय वाले परिवारों को हर महीने औसतन पंद्रह सौ रुपये की सहायता मिल रही है। यह राशि ग्रामीण क्षेत्रों में मासिक खर्च का लगभग चौहत्तर प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में इक्यावन प्रतिशत तक सहारा दे सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि अतिरिक्त आय मिलने से परिवार जरूरी वस्तुओं की खरीद जारी रख सकते हैं, आर्थिक दबाव के समय खर्च बनाए रख सकते हैं, पुराना कर्ज चुका सकते हैं या भविष्य के लिए बचत भी कर सकते हैं। हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि केवल नकद सहायता लंबे समय का समाधान नहीं है। देश में घरेलू मांग को स्थायी मजबूती देने के लिए रोजगार, आय वृद्धि और आर्थिक अवसरों का विस्तार भी उतना ही जरूरी है। सुबोध/०५-०५-२०२६