* अडालज त्रिमंदिर परिसर में तीन दिवसीय शिविर, पारदर्शिता, डिजिटल गवर्नेंस और जनकल्याण पर जोर * पीएम मोदी के ‘सबका साथ, सबका विकास’ मंत्र को आगे बढ़ाते हुए कलेक्टरों को संवेदनशील और जवाबदेह प्रशासन का संदेश गांधीनगर (ईएमएस)| मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने राज्य सरकार के राजस्व विभाग की त्रिदिवसीय चिंतन शिविर का शुभारंभ करते हुए कहा कि यह शिविर आत्ममंथन और समाज के अंतिम व्यक्ति के कल्याण पर विचार करने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि राजस्व विभाग और जिला कलेक्टरों की सामूहिक शक्ति से “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” के मंत्र को गुजरात में प्रभावी रूप से लागू किया जा सकता है। अडालज स्थित त्रिमंदिर परिसर में आयोजित इस शिविर का विषय “बेहतर भूमि शासन के लिए सहयोग करें, नवाचार करें और परिवर्तन लाएं” रखा गया है, जिसमें राज्य के सभी जिला कलेक्टर और राजस्व अधिकारी भाग ले रहे हैं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से अपेक्षा की कि वे बिना किसी दबाव के स्पष्टता और संवेदनशीलता के साथ जनता की समस्याओं का समाधान करें तथा अपने व्यवहार से लोगों में संतोष की भावना पैदा करें। शिविर में आध्यात्मिक प्रेरणा देते हुए दीपकभाई देसाई ने कर्म, सेवा और आध्यात्म को जोड़ने पर बल दिया। उन्होंने दादा भगवान के सिद्धांतों का उल्लेख करते हुए ईमानदारी, परोपकार, संयम और नैतिक जीवन जीने की प्रेरणा दी। राज्य मंत्री संजयसिंह महिडा ने बताया कि सरकार नागरिक सेवाओं को सरल बनाने के लिए आईओआरए और ई-धरा जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से ‘फेसलेस’ और ‘पेपरलेस’ गवर्नेंस को बढ़ावा दे रही है। साथ ही, ड्रोन और सैटेलाइट तकनीक से भूमि रिकॉर्ड को अधिक सटीक और पारदर्शी बनाया जा रहा है। मुख्य सचिव मनोज कुमार दास ने तकनीक और पारदर्शिता को विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की कुंजी बताते हुए कहा कि राजस्व विभाग ने विकास परियोजनाओं के लिए भूमि आवंटन में उल्लेखनीय कार्य किया है। वहीं, अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. जयन्ती रवी ने कहा कि प्रशासन में आध्यात्मिक संतुलन और ऊर्जा भी उतनी ही आवश्यक है जितनी तकनीकी दक्षता। इस चिंतन शिविर के माध्यम से राज्य के राजस्व तंत्र में गुणात्मक परिवर्तन लाने और नागरिकों को बेहतर सेवाएं प्रदान करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस चिंतन शिविर में राज्य के सभी जिला कलेक्टर, राजस्व अधिकारी और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे। सतीश/05 मई