राज्य
05-May-2026
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:: तकनीकी शिक्षा मंत्री की अध्यक्षता में शासी निकाय की 129वीं बैठक में हुए बड़े निर्णय, विद्यार्थियों का हित सर्वोपरि :: इंदौर/भोपाल (ईएमएस)। प्रदेश के प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थान श्री गोविंदराम सेकसरिया प्रौद्योगिकी एवं विज्ञान संस्थान (एसजीएसआईटीएस), इंदौर के शैक्षणिक और प्रशासनिक ढांचे को लेकर मंगलवार को मंत्रालय में महत्वपूर्ण मंथन हुआ। तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार की अध्यक्षता में आयोजित शासी निकाय की 129वीं बैठक में जहाँ हिंदी माध्यम के छात्रों और मेधावियों के लिए प्रोत्साहन की झड़ी लगा दी गई, वहीं अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे छात्रों को फीस के मोर्चे पर मायूसी हाथ लगी है। बैठक में विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं पर तो मुहर लगी, लेकिन लगभग दोगुनी की गई फीस को कम करने को लेकर कोई निर्णय नहीं लिया जा सका। संस्थान में पिछले कुछ समय से फीस वृद्धि को लेकर चल रहा विद्यार्थियों का आक्रोश सड़कों पर आ गया था। भारी विरोध और छात्र आंदोलन के बीच यह उम्मीद जताई जा रही थी कि शासी निकाय की इस उच्च स्तरीय बैठक में बढ़ी हुई फीस को घटाने पर कोई बड़ा फैसला होगा। हालांकि, पूरी बैठक के दौरान फीस वृद्धि के मुद्दे पर चर्चा तो हुई, लेकिन उसे कम करने या वापस लेने पर कोई सहमति नहीं बन पाई। प्रशासन ने वित्तीय सहायता योजनाओं का विकल्प तो सामने रखा, मगर छात्रों की फीस कम करो की मूल मांग पर फिलहाल चुप्पी साध ली गई है। फीस कटौती पर निर्णय न होने के बीच संस्थान ने अटल वित्तीय सहायता योजना को एक बड़े मरहम के तौर पर पेश किया है। वर्ष 2025 और उसके उपरांत प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों (डिप्लोमा धारकों सहित) के लिए प्रतिवर्ष 1.00 करोड़ रुपये की आनुपातिक आर्थिक सहायता का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही, तकनीकी शिक्षा में हिंदी को बढ़ावा देने के लिए बी.टेक (सिविल इंजीनियरिंग) हिंदी माध्यम के प्रत्येक छात्र को अंतिम वर्ष में पहुँचने पर 2 लाख रुपये की वित्तीय सहायता देने का ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है। :: नवाचार के दो नए केंद्र रचेंगे भविष्य की इबारत :: संस्थान को शोध और अनुसंधान के वैश्विक पटल पर स्थापित करने के लिए दो नए उत्कृष्टता केंद्रों (सेंटर ऑफ एक्सीलेंस) की स्थापना का अनुमोदन किया गया। इनमें इंटीग्रेटेड हेल्थ केयर और स्ट्रेटेजिक टेक्नोलॉजीस शामिल हैं। ये केंद्र न केवल आधुनिक चिकित्सा उपकरणों पर शोध करेंगे, बल्कि देश की सामरिक सुरक्षा से जुड़ी तकनीकों को भी विकसित करने का कार्य करेंगे। :: पारदर्शिता की कसौटी पर होगी शिक्षकों की भर्ती :: संस्थान में शिक्षकों के रिक्त पदों को लेकर मंत्री परमार ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी हो और शासन के रोस्टर नियमों का अक्षरशः पालन किया जाए। इसके साथ ही, छात्र-शिक्षक अनुपात को सुधारने के लिए सेल्फ फाइनेंस मोड में पद सृजन और अनुभवी विशेषज्ञों को प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस के रूप में नियुक्त करने पर भी विस्तृत चर्चा हुई। :: दिग्गज विशेषज्ञों ने रखा भविष्य का रोडमैप :: बैठक में आईआईटी बॉम्बे के पद्मश्री डॉ. डी.बी. फाटक, आरजीपीवी के कार्यवाहक कुलगुरु डॉ. एस.सी. चौबे और संस्थान के निदेशक प्रो. नीतेश पुरोहित सहित कई शिक्षाविद और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। मंत्री परमार ने अंत में दोहराया कि विद्यार्थियों का समग्र हित ही हमारी प्राथमिकता है, हालांकि फीस वृद्धि को लेकर असंतुष्ट छात्रों की नजरें अब भी भविष्य की संभावनाओं पर टिकी हैं। प्रकाश/05 मई 2026