क्षेत्रीय
17-May-2026


औषधि प्रोसेसिंग केन्द्र डूबा, नहीं बना जू पार्क -दो दशक से जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा और अधिकारियों की मनमानी हावी -योजनाएं बनती रही,सरकारी पैसे का दुरुपयोग होता रहा, अब भरतादेव वीरान पड़ा छिंदवाड़ा (ईएमएस)। शहर से पांच किमी दूर प्राकृतिक और धार्मिक स्थल भरतादेव में पिछले दो दशक में कोई प्रोजेक्ट सफल नहीं हो पाए है। वन विभाग की ओर से संचालित अगरबत्ती व वन औषधि प्रसंस्करण केन्द्र डूब गया। पहले बायोडायवर्सिटी पार्क और अब जू पार्क का सपना भी पूरा नहीं हो पाया है। इस पूरे मामले में जनप्रतिनिधियों की उदासीन देखने को मिली वहीं अधिकारी लापरवाह दिखाई दिए। देखा जाए तो वर्ष 2005 के बाद भरतादेव में वन विभाग द्वारा औषधि प्रसंस्करण केन्द्र की स्थापना की गई थी। उसमें रोजगार आधारित अगरबत्ती का निर्माण तथा हर्रा, बहेड़ा, आंवला के सहउत्पाद बनाए गए। उसकी मार्केटिंग वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी नहीं कर पाए। धीरे-धीरे प्रसंस्करण केन्द्र में ताला लग गया। उसके बाद उसे किसी एनजीओ या फिर संस्था को देने के प्रयास किए गए। उसमें भी सफलता नहीं मिल सकी। 2019 में आया बायोडायवर्सिटी पार्क का प्रोजेक्ट वर्ष 2019-20 में भरतादेव में करीब 8.50 करोड़ रुपए से बायोडायवर्सिटी पार्क का प्रस्ताव था। जिसमें तालाब में बोटिंग, झूले और तितली पार्क तथा टिकट घर आदि की प्लानिंग बनाई गई थी। प्लान यहीं था कि घर में कोई मेहमान आ जाए तो उसे भरतादेव में आनंदपूर्वक भ्रमण कराया जाए। इसे नगर निगम की वर्ष 2021 की पंचवर्षीय योजना में शामिल किया गया था। बजट के अभाव में योजना आगे नहीं बढ़ सकी। फिर भरतादेव में इंदौर की तर्ज पर जू पार्क का प्रस्ताव किया गया। उसके लिए राज्य सरकार से पत्राचार किया गया। इस पर किसी ने रुचि नहीं ली। ईएमएस/मोहने/ 17 मई 2026