अंतर्राष्ट्रीय
25-May-2026


-पहले भी ढा चुका है कहर, 11000 से ज्यादा लोगों की हुई थी मौत् वाशिंगटर,(ईएमएस)। डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआरसी) में इबोला वायरस का खतरा तेजी से बढ़ता जा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने चेतावनी दी है कि देश में अब तक 900 से ज्यादा संदिग्ध मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें 101 मामलों की आधिकारिक पुष्टि हो चुकी है। बढ़ते संक्रमण और हिंसा की वजह से हालात चिंताजनक हैं। डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक टेड्रोस गेब्रेयेसस ने बताया कि इबोला का सबसे ज्यादा असर डीआरसी के इतुरी प्रांत में देखा जा रहा है। यह इलाका लंबे समय से हिंसा और संघर्ष से प्रभावित है। यहां करीब 50 लाख लोग रहते हैं, जिनमें बड़ी संख्या में लोग मानवीय संकट का सामना कर रहे हैं। हर चार में से एक व्यक्ति को मदद की जरूरत है, जबकि हर पांच में से एक व्यक्ति अपना घर छोड़ चुका है। टेड्रोस ने एक्स पर कहा कि लगातार हिंसा और असुरक्षा की वजह से स्वास्थ्यकर्मियों और राहत एजेंसियों का काम बेहद कठिन हो गया है। उन्होंने कहा कि समय पर मरीजों की पहचान न होने से इलाज में देरी हो रही है, जिससे संक्रमण फैलने का खतरा और बढ़ जाता है। डर और असुरक्षा के माहौल के कारण लोगों का स्वास्थ्य एजेंसियों पर भरोसा भी कम हो रहा है। डब्ल्यूएचओ और अन्य स्वास्थ्य संगठन अभी भी इतुरी के दूरदराज और असुरक्षित इलाकों में काम कर रहे हैं। इन क्षेत्रों में लोग केवल इबोला ही नहीं, बल्कि कई दूसरी गंभीर बीमारियों से भी जूझ रहे हैं। स्वास्थ्य सेवाओं की कमी और लगातार संघर्ष ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। डब्ल्यूएचओ प्रमुख ने कहा कि लोगों को सिर्फ इबोला से बचाना ही काफी नहीं है, बल्कि उन्हें जरूरी स्वास्थ्य सेवाएं और भरोसा देना भी बेहद जरूरी है। बता दें 16 मई को डब्ल्यूएचओ ने डीआरसी और युगांडा में फैल रहे इबोला प्रकोप को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी ऑफ इंटरनेशनल कंसर्न घोषित किया था। इसके बाद 22 मई को संगठन ने डीआरसी में इबोला के खतरे का स्तर राष्ट्रीय स्तर पर बहुत ज्यादा कर दिया। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक इबोला एक बेहद खतरनाक और जानलेवा वायरस है। यह बीमारी पहले जंगली जानवरों, खासकर चमगादड़ और कुछ बंदरों से इंसानों में फैलती है। बाद में संक्रमित व्यक्ति के खून, पसीने, शरीर के तरल पदार्थ या उसके इस्तेमाल की चीजों के संपर्क से यह बीमारी दूसरे लोगों तक पहुंच जाती है। इस वायरस ने साल 2014-2016 से दौरान कहर ढाया था और कुल मिलाकर इससे 11000 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी, जबकि 28000 से ज्यादा संदिग्ध मिले थे। सिराज/ईएमएस 25मई26