अंतर्राष्ट्रीय
25-May-2026


-संदेश सिर्फ दूतों के जरिए पहुंचाए जा रहे, ठिकाना पूरी तरह गुप्त वाशिंगटन,(ईएमएस)। अमेरिका और ईरान के बीच जंग खत्म होने की कगार पर पहुंच गई है। डील लगभग तैयार बताई जा रही है, लेकिन इसी बीच अमेरिका की खुफिया एजेंसी सीआईए और इजराइल की मोसाद की पोल खोल दी है। जिस ईरान को हफ्तों तक बमों और मिसाइलों से झकझोरा गया, उसके सबसे बड़े नेता मोजतबा खामेनेई का ठिकाना अब तक अमेरिका और इजराइल खोज नहीं पाए हैं। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई इस वक्त किसी अज्ञात जगह पर छिपे हुए हैं और उनका बाहरी दुनिया से संपर्क कट चुका है उनसे सीधे बात करने का रास्ता नहीं है। संदेश सिर्फ दूतों के एक जटिल नेटवर्क के जरिए पहुंचाए जा रहे हैं, ताकि उनका ठिकाना पूरी तरह गुप्त रहे। वहीं ईरान अब खोज-खोज कर जासूसों को लटका रहा है। यही वजह है कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रही डील बार-बार अटक रही है। अमेरिकी अधिकारी बताते हैं कि जब वॉशिंगटन कोई प्रस्ताव भेजता है, तो उसे मोजतबा खामेनेई तक पहुंचाने में लंबा वक्त लगता है, क्योंकि उन तक संदेश किसी व्यक्ति के जरिए पहुंचाया जाता है, न कि कोई इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से। रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने दावा किया कि मोजतबा खामेनेई मौजूदा मसौदा समझौते की बड़ी शर्तों पर सहमत हो चुके हैं। ट्रंप ने भी सोशल मीडिया पर कहा कि अगले कुछ दिनों में अंतिम फैसला आ सकता है। ऑपरेशन एपिक फ्यूरी में अमेरिकी और इजराइली हमलों के दौरान मोजतबा खामेनेई घायल हुए थे। इसके बाद उन्होंने सुरक्षा के बेहद कड़े इंतजाम कर लिए हैं। अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि अमेरिका और इजराइल को ईरानी सरकार के भीतर से काफी खुफिया जानकारी मिली, जिसकी मदद से युद्ध के दौरान ईरान के कई बड़े नेताओं को निशाना बनाया गया, लेकिन सबसे ऊपर बैठे मोजतबा तक पहुंचना अब भी मुश्किल है। रिपोर्ट के मुताबिक इस वक्त ईरान के ज्यादातर बड़े नेता हफ्तों से मजबूत बंकरों में हैं। वे खुली जगह में नहीं निकलते और जरूरत पड़ने पर ही एक-दूसरे से बात करते हैं। एक अमेरिकी अधिकारी ने तंज करते हुए कहा कि उन्हें आपस में बात करने की कोशिश करते देखना किसी सिटकॉम जैसा लगता है। वे पूरी तरह परेशान हैं, लेकिन सबसे ज्यादा सावधानी खुद सुप्रीम लीडर के लिए बरती जा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक मोजतबा खामेनेई अपने अधीन अधिकारियों को सिर्फ बड़े स्तर पर दिशा-निर्देश देते हैं। वह बताते हैं कि किन मुद्दों पर बातचीत हो सकती है और किन पर बात नहीं करनी है। सिराज/ईएमएस 25मई26