राज्य
25-May-2026


सुविधा के बदले पाटन उपजेल में वसूली का खेल जबलपुर (ईएमएस)। जेल के अंदर बंदियों को सुविधाएं उपलब्ध कराने वसूली का खेल बहुत पुराना है. मानव अधिकार आयोग विधिक सेवा प्राधिकरण आने के बाद भी हालातों में कोई सुधार नहीं हुये. आज भी जेलों को भले ही सुधार ग्रह का नाम दिया गया हो, लेकिन यहां विचाराधीन बंदियों पर सजायाफ्ता कैदी राज करते हैं और नम्बरदारों के इस्तेमाल कर जेल के अधिकारी अवैध वसूली धड़ल्ले से करते हैं. पहले यह खेल पेशी पर आने के दौरान चलता था. अब आनलाईन पेशी होने से वसूली का पेशा भी बदल गया है. अब मुलाकात के दौरान आने वाले परिजनों तक संदेश पहुंचाया जाता है. जिनकी मुलाकात नहीं आती उनके घर चिट्ठी गुमनाम भेजी जाती है. ऐसा ही एक मामला पाटन उपजेल से निकलकर सामने आया है, इस उपजेल में बंद एक कैदी ने अपनी रिहाई होने के बाद पूरे मामले का खुलासा किया है. इस कैदी की मानें तो जेल के अंदर वसूली के लिए प्रताड़ित किया जाता है। इसमें मारपीट से लेकर कई प्रकार से प्रताड़ना दी जाती है। प्रताड़ना देने के लिए जेलर हेमेंद्र बागरी और रचना चौकसे के इशारे पर चार आजीवन कारावास की सजा भुगत रहे कैदियों को लगाया गया है। उसका कहना है कि जेल में पहुंचने के बाद वसूली शुरू हो जाती है। वसूली देने वाले बंदी को उसके हिसाब से आराम दिया जाता है। उधर, मुफ्त में रहने वाले बंदियों को तरह तरह से प्रताड़ित किया जाता है। जेल के अंदर भूखा रखा जाता है और मारपीट की जाती है. विचाराधीन बंदी के अधिवक्ता और उसकी मां ने भी जेल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं. जब तक पैसा जाता रहा तब तक सुविधा मिलती रही, जब पैसे पहुंचाना बंद किया तो प्रताड़ना शुरु हो गई. आरोप है कि जेल गेट से अंदर होते ही जेल पर खाना-तलाशी के दौरान ही बंदी की बोली लग जाती है। बोली लगाने के काम पर पुराने कैदियों को लगाया जाता है. पाटन उपजेल में जो मामला सामने आया है उसमें कथित कैदी भूरा पटेल, विष्णु, कल्लू और संतोष पर आरोप है कि यह लोग नये बंदियों के पहुंचते ही वसूली का खेल शुरु कर देते हैं. धीरे धीरे महीना वसूली तय कर दी जाती है और मुलाकात के दौरान बंदी के परिजनों को यह संदेश मिल जाता है कि यदि बंदी को अंदर सुकून से रखना है तो इतना खर्चा देना ही होगा. यह खर्चा बाद में जेल अधिकारियों के बीच भी बांटा जाता है. वसूली में लगाए गये आरोपी चार कैदी जेल अधिकारियों के इशारे पर काम करते हैं. बताया गया है कि पिछले दिनों जेल में विधिक सेवा प्राधिकरण के जिम्मेदारों ने औचक निरीक्षण किया तो जेलर अन्य अधिकारी ड्यूटी पर नहीं मिले. जेल के बच्चा वार्ड में चार कैदी टीवी का लुत्फ ले रहे थे. बंदियों से पूछताछ में उन्होंने अफसरों की करतूत बयान की. जेल में औचक विधिक सेवा प्राधिकरण की जांच में गायब मिले जेलर. बंदी के साथ मारपीट के मामले में जब उसका मुलायजा कराया गया तो वह जेल प्रशासन के दबाव में मुकर गया। सुनील साहू / शहबाज / 25 मई 2026/ 06.25