- 68 गांवों के ग्रामीणों ने अंतागढ़ में किया चक्काजाम कांकेर (ईएमएस)। जिले के कोयलीबेड़ा क्षेत्र की लंबित मांगों को लेकर चल रहा जनआंदोलन अब निर्णायक चरण में पहुंचता दिखाई दे रहा है। पिछले आठ दिनों से धरने पर बैठे ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन की ओर से कोई ठोस पहल नहीं होने का आरोप लगाते हुए अंतागढ़ में अनिश्चितकालीन चक्काजाम शुरू कर दिया है। 18 पंचायतों के 68 गांवों से पहुंचे सैकड़ों ग्रामीणों ने सड़क पर उतरकर यातायात पूरी तरह बाधित कर दिया, जिससे क्षेत्र में आवागमन प्रभावित हो गया।प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी समस्याओं को लेकर आवाज उठा रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। इसी नाराजगी के चलते ग्रामीणों ने आंदोलन को और तेज करने का फैसला लिया। चक्काजाम के दौरान आंदोलनकारियों में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, सांसद और विधायक के प्रति भी नाराजगी देखने को मिली। ग्रामीणों की प्रमुख मांगों में कोयलीबेड़ा में जिला सहकारी बैंक की स्थापना, ब्लॉक मुख्यालय को पखांजूर से वापस कोयलीबेड़ा लाना, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में महिला चिकित्सक की नियुक्ति और क्षेत्र में स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट विद्यालय की स्थापना शामिल है। इसके अलावा प्रदर्शनकारी खनिज न्यास निधि (डीएमएफ) की राशि का प्रभावित क्षेत्रों में पूर्ण उपयोग, जर्जर स्कूलों एवं आश्रमों की मरम्मत, कॉलेज की स्थापना तथा किसानों के लिए पर्याप्त खाद और बीज उपलब्ध कराने की मांग भी कर रहे हैं। आंदोलनकारियों ने अंतागढ़-कोयलीबेड़ा मार्ग के डामरीकरण और कोयलीबेड़ा तहसील को प्रशासनिक रूप से अनुभाग अंतागढ़ से जोड़ने की मांग को भी प्रमुखता से उठाया है। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से इन मुद्दों पर केवल आश्वासन मिलते रहे हैं, जबकि जमीनी स्तर पर अपेक्षित कार्य नहीं हुए हैं। चक्काजाम के कारण अंतागढ़ मार्ग पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। यात्री और वाहन चालक घंटों तक सड़क पर फंसे रहे। स्थिति को देखते हुए प्रशासन और पुलिस की टीम मौके पर तैनात रही तथा आंदोलनकारियों से लगातार चर्चा कर समाधान निकालने का प्रयास किया जा रहा है। इधर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आंदोलन को लेकर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि किसी भी समस्या का समाधान संवाद के माध्यम से निकाला जा सकता है। उन्होंने कहा कि यदि लोगों की कोई मांग या समस्या है तो उसे सरकार के समक्ष रखा जाना चाहिए। सरकार सभी मुद्दों पर संवेदनशीलता और सहानुभूतिपूर्वक विचार करने के लिए प्रतिबद्ध है। हालांकि आंदोलनकारी फिलहाल अपने रुख पर कायम हैं। उनका कहना है कि जब तक उनकी मांगों को लेकर स्पष्ट और ठोस आश्वासन नहीं दिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। क्षेत्र में बढ़ते जनसमर्थन को देखते हुए यह आंदोलन आने वाले दिनों में और व्यापक रूप ले सकता है। - ईएमएस / 04 जून 2026