क्षेत्रीय
04-Jun-2026
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खैरागढ़(ईएमएस)। शहर के चर्चित एडवर्ड चिल्ड्रन पार्क भूमि विवाद ने एक बार फिर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है। करोड़ों रुपये मूल्य की भूमि से जुड़े इस मामले में पुराने राजस्व अभिलेख, नजूल रिकॉर्ड और दशकों पुरानी रजिस्ट्री को लेकर नए सवाल खड़े हो रहे हैं। विवाद गहराने के बाद अब मामले की जांच की मांग तेज हो गई है और प्रशासनिक स्तर पर भी इसकी पड़ताल की संभावना जताई जा रही है। जानकारी के अनुसार, विवादित भूमि से जुड़े दस्तावेजों में वर्ष 1974 की एक रजिस्ट्री का उल्लेख मिलता है, जिसमें कुछ भूखंडों का नामांकन तत्कालीन एडवर्ड पार्क क्षेत्र से जुड़ा बताया गया है। रजिस्ट्री में दर्ज विवरण और वर्तमान राजस्व अभिलेखों के बीच सामंजस्य को लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। यही कारण है कि यह मामला अब केवल संपत्ति हस्तांतरण का नहीं, बल्कि सार्वजनिक उपयोग की भूमि की स्थिति और उसके उपयोग परिवर्तन से जुड़ा बड़ा प्रश्न बन गया है। मामले में सामने आए राजस्व अभिलेखों के अनुसार संबंधित खसरा नंबरों में सड़क, रास्ता, घास भूमि और अन्य सार्वजनिक उपयोग की श्रेणियों का उल्लेख होने की बात कही जा रही है। वहीं कुछ अभिलेखों में संबंधित भूखंडों को एडवर्ड चिल्ड्रन पार्क और उससे जुड़े क्षेत्र के रूप में दर्ज बताया गया है। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि यदि भूमि सार्वजनिक उपयोग की श्रेणी में थी तो समय के साथ उसके स्वरूप और स्वामित्व में बदलाव किस प्रक्रिया के तहत हुआ। संयुक्त जांच से जुड़े दस्तावेजों में यह भी उल्लेख किया गया है कि विवादित भूमि के बड़े हिस्से का विभिन्न चरणों में विभाजन कर अलग-अलग लोगों को विक्रय किया गया। बताया जा रहा है कि भूमि को कई हिस्सों में बांटकर प्लॉटिंग की गई, जिसके कारण विवाद और अधिक गंभीर हो गया है। वर्तमान बाजार मूल्य के आधार पर इस जमीन की कीमत करोड़ों रुपये आंकी जा रही है। यह मामला नया नहीं है। इससे पहले भी क्षेत्र में कथित अवैध प्लॉटिंग और भूमि उपयोग को लेकर सवाल उठ चुके हैं। पूर्व में जनप्रतिनिधियों द्वारा विधानसभा में भी इस विषय को उठाया गया था, जिसके बाद प्रशासनिक जांच की प्रक्रिया शुरू हुई थी। जांच के दौरान कुछ भूखंडों को लेकर आपत्तियां सामने आई थीं और कुछ मामलों में आगे की कार्रवाई भी की गई थी। विवाद के बढ़ने के साथ ही लोगों के बीच यह चर्चा भी तेज हो गई है कि सार्वजनिक महत्व की भूमि से जुड़े मामलों में जांच और कार्रवाई की प्रक्रिया कितनी प्रभावी रही है। स्थानीय स्तर पर कई लोग यह मांग कर रहे हैं कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर सभी दस्तावेजों और रिकॉर्ड की गहन समीक्षा की जाए, ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके। वहीं भूमि से जुड़े पक्ष का कहना है कि उनके पास विधिवत पंजीकृत दस्तावेज, सीमांकन प्रतिवेदन और राजस्व रिकॉर्ड उपलब्ध हैं। उनका दावा है कि संबंधित भूमि लंबे समय से उनके नाम पर दर्ज है और समय-समय पर प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत उसका सीमांकन भी किया गया है। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन या शासन द्वारा किसी प्रकार की जानकारी मांगी जाती है तो सभी आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत किए जाएंगे। फिलहाल यह मामला खैरागढ़ की सबसे चर्चित भूमि विवादों में शामिल हो चुका है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासनिक जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और विवादित भूमि को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब किस प्रकार मिलता है। सत्यप्रकाश(ईएमएस)04 जून 2026