पिछले साल 118 तो इस साल 21 लोगों की जा चुकी है जान, हजारों किलो ड्रग्स जब्त आइजोल,(ईएमएस)। मिजोरम की राजधानी आइजोल में रात के अंधेरे और सन्नाटे में युवक हाथों में टॉर्च और डंडे लिए घूम रहे हैं। ये पुलिस नहीं, बल्कि ‘यंग मिजो एसोसिएशन’ (वाईएमए) के वॉलेंटियर्स हैं, जो सूबे की रगों में घोले जा रहे म्यांमार के सिंथेटिक ड्रग्स ‘आइस’ से अगली पीढ़ी को बचाने पहरा दे रहे हैं। मिजोरम इस समय नशा संकट से जूझ रहा है। म्यांमार की 500 किमी लंबी खुली सीमा से आने वाले खतरनाक सिंथेटिक ड्रग्स ने राज्य के सामाजिक ताने-बाने को बिखेर दिया है। पिछले साल इस ड्रग्स ने 118 तो इस साल अब तक 21 लोगों की जानें ली हैं। म्यांमार सीमा से सटा चंफाई जिला इसका मुख्य कॉरिडोर है। बीते तीन साल में यहां से करीब चार हजार किलो ड्रग्स जब्त हुई है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक चौंकाने वाली बात यह है कि पूरा कारोबार डिजिटली हो रहा है। ड्रग्स सप्लायर वॉट्सएप, टेलीग्राम, फेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर सीक्रेट ग्रुप्स बनाकर नेटवर्क चला रहे हैं। सिर्फ चैट ग्रुप का स्क्रीन शॉट दिखाकर आसानी से ड्रग्स मिल जाती है। जब वाईएमए के मेंबर से कुछ स्क्रीन शॉट मांगे तो उन्होंने सुरक्षा की दृष्टि से इन्हें देने से मना कर दिया। मिजोरम एक्साइज एंड नारकोटिक्स विभाग के संयुक्त आयुक्त ने बताया कि स्थानीय नेटवर्क में ‘आइस’ और ‘कैंडी’ जैसे कोड वर्ड्स से ड्रग्स बेची जा रही है। रिपेार्ट के मुताबिक पिछले महीनों में ड्रग्स की होम डिलीवरी भी हो रही है। आइजोल स्थित सामाजिक कार्यकर्ता ने बताया कि वह इस साल 10 अप्रैल से 28 मई के बीच केवल आइजोल में 239 मरीज मिले हैं। इतने कम समय में इतने मरीज मिलना स्थिति की भयावहता को दिखाता है। इनमें से ज्यादातर लोग पहले शराब और गांजा पीते थे, लेकिन अब ड्रग्स ले रहे हैं। वाईएमए की सेंट्रल कमेटी के महासचिव ने बताया कि सीमा के पार म्यांमार का रिहखावदार इलाका है, जहां दोनों ओर के लोगों के पारिवारिक संबंध हैं। इसी आवाजाही की आड़ में रात के अंधेरे में छोटे पेडलर्स घने जंगलों और पहाड़ी पगडंडियों से ड्रग्स की खेप भारत लाते हैं। यहां से ड्रग्स देश के अन्य हिस्सों के साथ-साथ बांग्लादेश और अरब देशों तक भेजी जा रही है। सिराज/ईएमएस 14जून26