अंतर्राष्ट्रीय
15-Jun-2026


टोक्यो (ईएमएस)। दुनिया के सबसे पुराने राजवंशों में शामिल जापान का शाही परिवार इन दिनों उत्तराधिकार संकट का सामना कर रहा है। शाही परिवार में पुरुष उत्तराधिकारियों की लगातार घटती संख्या ने सरकार और संसद को नए विकल्पों पर विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है। इसी कड़ी में एक प्रस्ताव सामने आया है, जिसके तहत शाही परिवार को पूर्व शाही वंशों के पुरुष वंशजों को गोद लेने की अनुमति दी जा सकती है, ताकि भविष्य में राजगद्दी के लिए उत्तराधिकारियों की कमी न हो। वर्तमान में जापान के सम्राट नारुहितो के बाद उत्तराधिकार की कतार में केवल तीन पुरुष सदस्य हैं— युवराज अकिशिनो, उनके पुत्र हिसाहितो और बुजुर्ग राजकुमार हिताची। शाही परिवार की कुल सदस्य संख्या भी घटकर मात्र 16 रह गई है। जापान के कानून के अनुसार केवल पुरुष वंशज ही क्रिसेंथेमम थ्रोन पर बैठ सकते हैं। संसद में विचाराधीन प्रस्ताव के अनुसार, वर्ष 1947 में शाही दर्जा खो चुके 11 पूर्व शाही परिवारों के पुरुष वंशजों को दोबारा शाही परिवार का हिस्सा बनाया जा सकता है। साथ ही, शाही परिवार की महिलाओं को आम नागरिकों से विवाह के बाद भी अपना शाही दर्जा बनाए रखने की अनुमति देने पर भी विचार किया जा रहा है। हालांकि यह प्रस्ताव विवादों से भी घिरा हुआ है। कई विशेषज्ञ और विपक्षी नेता चाहते हैं कि महिलाओं को भी राजगद्दी संभालने का अधिकार मिले। जनमत सर्वेक्षणों में बड़ी संख्या में लोगों ने सम्राट नारुहितो की पुत्री राजकुमारी आइको जैसी महिला उत्तराधिकारी का समर्थन किया है। इसके बावजूद प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची पुरुष-आधारित उत्तराधिकार व्यवस्था को बनाए रखने के पक्ष में हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह कानून पारित होता है तो जापान की हजारों वर्ष पुरानी राजशाही परंपरा को बनाए रखने में मदद मिल सकती है। वहीं महिला उत्तराधिकार को लेकर बहस भी आने वाले समय में और तेज होने की संभावना है। सुबोध/१५ -०६-२०२६