- ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव बाजार में बढ़ा सकता है अस्थिरता मुंबई (ईएमएस)। इस सप्ताह भारतीय शेयर बाजार की दिशा मुख्य रूप से पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और उससे जुड़ी भू-राजनीतिक घटनाओं पर निर्भर करेगी। बाजार के जानकारों ने कहा कि इस संघर्ष के चलते बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है, जिससे एफपीआई (विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक) की बिकवाली बढ़ी है। उन्होंने यह भी कहा कि जब तक संघर्ष का स्पष्ट परिणाम सामने नहीं आता और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट नहीं होती, विदेशी निवेशक बाजार में बड़े पैमाने पर निवेश करने की संभावना कम है। वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड इस सप्ताह 8.52 प्रतिशत उछलकर 92.69 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि उच्च तेल कीमतें भारत जैसी तेल आयातक अर्थव्यवस्थाओं के लिए नकारात्मक संकेत हैं। उन्होंने कहा कि ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को प्रभावित करता है और बाजार में अस्थिरता बढ़ा सकता है। उन्होंने कहा कि ब्रेंट क्रूड का 90 डॉलर से ऊपर होना भारतीय अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार के लिए बुरी खबर है। विश्लेषकों के अनुसार वैश्विक बाजार के रुझान और एफपीआई की गतिविधियां भी निवेशकों की धारणा को प्रभावित करेंगी। यदि वैश्विक बाजार सकारात्मक रहेगा, तो कुछ हद तक भारतीय बाजार में स्थिरता बनी रह सकती है। लेकिन पश्चिम एशिया संकट और तेल की कीमतों में तेजी इसे दबाव में रख सकते हैं। घरेलू मोर्चे पर निवेशक 12 मार्च को आने वाले उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) मुद्रास्फीति के आंकड़ों पर ध्यान केंद्रित करेंगे। ये आंकड़े निवेशकों को अर्थव्यवस्था की वर्तमान स्थिति और मौद्रिक नीति के रुझान का संकेत देंगे। सतीश मोरे/08मार्च ---