मुम्बई (ईएमएस)। टी20 विश्वकप में शानदार प्रदर्शन कर भारतीय क्रिकेट टीम की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले बल्लेबाज संजू सैमसन टूर्नामेंट में तीन बार शतक के करीब आकर भी उसे पूरा नहीं कर पाये क्योंकि टीम की जरुरतों के हिसाब से उन्होंने तेजी से खेला। इसी को लेकर एक कार्यक्रम में संजू ने माना है कि एक बार उसके मन में शतक बनाने का विचार आया पर अगले ही पल उसे लगा कि शतक से अधिक टीम की जीत जरुरी है। इसलिए उसने शतक का विचार छोड़कर टीम की जरुरतों के हिसाब से खेलना तय किया। सैमसन ने पांच मैचों में कुल 321 रन बनाये। इस दौरान उनका स्ट्राइक रेट 199.37 का रहा। वह टूर्नामेंट में भारत की ओर से सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी रहे। उनके पास तीन बार शतक लगाने का अवसर था पर उन्होंने निजी उपलब्धि की चिंता नहीं की। उन्होंने वेस्टइंडीज के खिलाफ करो या मरो सुपर-8 मैच में नाबाद 97 रन बनाये जबकि इंग्लैंड के खिलाफ सेमीफाइनल में 89 रन बनाए। इसके अलावा न्यूजीलैंड के विरुद्ध फाइनल में 89 रन बनाये। सैमसन ने कहा, लोग कहते हैं कि मैं तीन बार शतक नहीं लगा पाया पर मुझे लगता है उससे बहुत बड़ा काम हुआ है। मैंने शतक न बनाकर अधिक बेहतर योगदान दिया। मुझे ऐसा ही लगता है हालांकि मैं ये नहीं कहूंगा कि मैंने 100 के बारे में सोचा ही नहीं। हर किसी की तरह ही मेरे मन में भी आया था कि एक बार 100 बन जायें तो और अधिक मजा आयेगा पर बाद में सोचा कि जिस प्रकार खेलते हुए मैं यहां तक पहुंचा हूं, वैसे ही खेलूंगा। सैमसन ने गौतम गंभीर की बात को बल दिया कि टीम में निजी उपब्धियों की जगह टीम गेम जरुरी है। सैमसन ने कहा कि मेरा भी मानना है कि टीम सबसे पहले है। । शुरुआत से ही तय हो गया था कि सभी टीम हित को सबसे पहले रखेंगे। सैमसन ने माना कि शुरुआत में अंतिम ग्यारह में जगह नहीं मिलने से वह हताश थे। ईएमएस 16 मार्च 2026